नोएडा (सुशील पांडेय)। सुपरटेक के ट्विन टावर गिराने के दौरान खतरे की जद में आसपास की छह हाईराइज इमारतें होंगी। प्राधिकरण समेत अलग-अलग एजेंसियों की ओर से सर्वे के दौरान इसका आकलन किया गया है। ऐसे में इसी के हिसाब से टावर गिराने की कार्ययोजना पेश करनी होगी।
सर्वे में बताया गया है कि ट्विन टावर की ऊंचाई करीब 100 मीटर है। टावर गिराने के दौरान इसके आधे यानी 50 मीटर तक मलबा गिरने की संभावना है। इसके बाद आसपास की इमारतों का भी सर्वे किया गया। इसमें एटीएस सोसाइटी से भी साइट प्लान मांगा गया। इसके बाद पता चला कि एटीएस की तीन इमारतें भी इसके दायरे में आ रही हैं। एमराल्ड कोर्ट की इमारत पहले से ही जद में है। ट्विन टावर से 9 मीटर पर एक, 22 मीटर पर एक, 31 मीटर पर दो और 32 व 33 मीटर पर एक-एक इमारत समेत कुल छह इमारतें मौजूद हैं। इन पर खतरा मंडराने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्विन टावर गिराने के दौरान इतना भारी भरकम मलबा गिरेगा कि इससे आसपास रिक्टर स्केल पर 6 से 7 तीव्रता का भूकंप का झटका भी महसूस होने की संभावना है। इसे ध्यान में रखते हुए काम करने की योजना है।
कंक्रीट की दीवारें बन सकती हैं बाधा
सुपरटेक की ओर से चयनित की गई एजेंसियां 29 और 30 अक्तूबर को मौके का जायजा लेंगी और आकलन करेंगी। इसमें एजेंसियों के अमेरिका, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं। इसमें पहले की रिपोर्ट को भी परखा जाएगा। इसके अलावा एजेंसियों की ओर से पहली बार पूरे ट्विन टावर के एक-एक एंगल का अध्ययन किया जाएगा। इमारत की दीवार भी कंक्रीट की बनी हुई है। टावर को तोड़ने की तकनीकी के दौरान इसका ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है।
कार्ययोजना तैयार करने में लग सकता है दो माह
एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि ट्विन टावर को गिराने के लिए काफी अध्ययन की जरूरत है और इसमें आसपास की इमारतों की सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाना होगा। इसमें मौके पर जायजा लेने के अलावा भी काफी एक्सरसाइज की जरूरत है। ऐसे में इसकी कार्ययोजना तैयार करने में दो माह भी लग सकते हैं। वहीं, दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 30 नवंबर तक टावर गिराने हैं। ऐसे में संभावना यह भी जताई जा रही है कि सुपरटेक की ओर से इस मामले में समय विस्तार के लिए कोर्ट से अपील की जाए। दो दिन बाद यह पता चल पाएगा कि कार्ययोजना कब तक तैयार होगी।