नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने ईसाई दंपती को उस छह साल की बच्ची का पालक माता पिता घोषित किया है जिसे उन्होंने जन्म के समय गलती से हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटीनेंस एक्ट में गोद लिया था। कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि दंपती ने बच्ची की अच्छी तरह देखभाल की है।
कोर्ट ने गौर किया कि चूंकि बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में जूवेनाइल जस्टिस (जेजे) एक्ट के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। इसलिए बच्ची को अमेरिका ले जाने के लिए जरूरी एनओसी जारी न करने के मामले में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोस अथॉरिटी (सीएआरए) को गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि बच्चा वैध रूप से गोद नहीं लिया गया।
हालांकि कोर्ट ने सारी बातों पर गौर करने के बाद सीएआरए को दंपती को एनओसी तथा केंद्र सरकार को बच्ची का पासपोर्ट जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एनआरआई और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) से संबंधित जेजे एक्ट के प्रावधान के पालन के लिए जोर नहीं डालेगा।
न्यायमूर्ति आशा मेनन ने अपने हालिया फैसले में कहा कि सीएआरए ये सुनिश्चित करेगा कि दो साल तक उसके द्वारा अधिकृत एजेंसी तिमाही और छमाही अंतराल पर होम स्टडी रिपोर्ट उसे सौंपेगी। इसके साथ ही उन्होंने दंपती को लिखित आश्वासन देने के लिए कहा कि वे बच्ची का पालन-पोषण अपनी बच्ची की तरह करेंगे और उसकी शिक्षा व विकास के अवसर प्रदान करेंगे। इसके साथ ही वह उसकी स्वास्थ्य जरूरतों का ख्याल रखेंगे। इसके साथ ही वह अपनी दत्तक बेटी के अमेरिका नागरिकता भी हासिल करेंगे।
हाईकोर्ट ने ये फैसला उस ईसाई दंपती की याचिका पर सुनाया है जिन्होंने खुद को बच्ची का पालक माता पिता घोषित करते हुए उन्हें बच्ची को अमेरिका ले जाने के लिए अनिवार्य एनओसी जारी करने का निर्देश सीएआरए को देने का आग्रह किया था। इसके साथ उन्होंने उनके नाम का जिक्र माता पिता के तौर पर करते हुए बच्ची का पासपोर्ट जारी करने का निर्देश केंद्र सरकार को देने का भी आग्रह किया था। - एजेंसी