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Noida News: फर्जी मालिक बन नकली दस्तावेज से रजिस्ट्री कराने वाले गिरोह के सात गिरफ्तार

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- जेवर के गांव कानपुर में 14 बीघा जमीन का 2.38 करोड़ रुपये में कर दिया था सौदा, एक फरार
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माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। जमीन का फर्जी मालिक बनकर और नकली दस्तावेज तैयार कर नोएडा एयरपोर्ट के पास भूखंड बेचने वाले गिरोह के सात आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान बुलंदशहर निवासी नीटू, जयवीर, भूरा उर्फ ओमवीर व पिंकू उर्फ देवीचरण और गौतमबुद्ध नगर निवासी सौरभ कुमार, राहुल भाटी और प्रथम भाटी के रूप में हुई है। एक आरोपी रबूपुरा निवासी रिंकू फरार है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने क्षेत्र के गांव कानपुर में 14 बीघा जमीन 2.38 करोड़ रुपये में बेचने का सौदा कर लिया था।
बदमाशों ने सौदे के लिए 21 लाख का बयाना भी ले लिया था। हालांकि खरीदार के साथ आए स्थानीय व्यक्ति ने जमीन के फर्जी मालिक को पहचान लिया। जिसके बाद पूरा मामला खुल गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से 1.07 लाख रुपये, 7 मोबाइल, फर्जी आधार कार्ड, फर्जी पैन कार्ड और कैंसिल चेक बरामद हुए हैं।
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गांव कानपुर निवासी नीरज देवी बेटे गौरव और वैभव सिंह के साथ दादरी में रहती हैं। नीरज की गांव में 50 बीघा जमीन है। गौरव दादरी में ही व्यापार करते हैं और कभी-कभी ही गांव आते हैं। हरियाणा के पानीपत निवासी मधुर गोयल और हार्दिक गोयल जेवर में जमीन तलाश रहे थे। इसी क्रम में उनकी मुलाकात आरोपियों से हुई। आरोपियों ने प्रथम भाटी भाटी को जमीन के मालिक गौरव सिंह के रूप में उनसे मिलाया। इसी नाम से बने आधार और पैन कार्ड दिखाए। इसी आधार पर बैंक में खाता भी खुलवाया। आरोपियों ने खुर्जा की रहने वाली सीमा को नीरज देवी के रूप में पेश कर 17 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से 14 बीघे का सौदा कर लिया।
खरीदार ने 15 लाख रुपये आरटीजीएस से खाते में डाल दिए। जबकि छह लाख रुपये कैश 20 जून को दे दिए। 26 जून को जमीन की रजिस्ट्री उप निबंधक कार्यालय में होनी थी। इस दिन खरीदार मधुर गोयल अपने स्थानीय परिचित जेवर निवासी गौतम सिंह और योगेश शर्मा के साथ पहुंचे। रजिस्ट्री कार्यालय में गिरोह के सदस्य पहुंचे और उनमें से एक ने खुद को गौरव सिंह और महिला ने नीरज देवी बताया। इस पर योगेश ने कहा कि यह लोग जमीन के असली मालिक नहीं है। वह असली मालिक को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। यहीं पर गिरोह का पर्दाफाश हो गया। यह सुनकर आरोपी फरार हो गए। पीड़ित ने पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पीड़ित के साथ आए गौतम सिंह की ओर से इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया।



मूल निवास से तैयार किए फर्जी दस्तावेज

पुलिस पूछताछ में पता चला कि प्रथम ने मूल निवास प्रमाण पत्र में नाम संशोधित कराया। इस प्रमाण पत्र के आधार पर खुद ही मोबाइल से ऑन लाइन तरीके से आधार कार्ड में नाम संशोधन किया। आधार कार्ड से पैन कार्ड तैयार कराया। इसके बाद आधार व पैन कार्ड के जरिए कोटक महिंद्रा बैंक में खाता खुलवाया। सभी दस्तावेज खरीदार को भी दिखाए जिससे खरीदार को भी कोई शक नहीं हुआ और 21 लाख रुपये गिरोह तक पहुंच गए।





कितने मामलों को दिया अंजाम, जांच की जा रही

पकड़े गए आरोपी सौरभ कुमार पर तीन मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने जब गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया तो कुछ स्थानीय लोग पुलिस के पास आए और कहा कि हमारे साथ भी धोखाधड़ी की गई है लेकिन अधिकांश ने शिकायत नहीं की थी। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्षेत्र में कितने ऐसे ही मामलों में गिरोह के लोगों का हाथ है। इसके साथ ही तहसील कार्यालय, रजिस्ट्री कार्यालय के कर्मचारियों की भी भूमिका की जांच की जा रही है।



गांव में नहीं रहने वालों की जमीन पर रहती है नजर

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह जेवर और आसपास के गांव व कस्बों में उन लोगों की जमीनों पर नजर रखते थे, जो लंबे समय से गांव में नहीं रहते हैं। ऐसे लोगों की की जमीन की जानकारी तहसील कार्यालय से जुटाई जाती थी। आरोपी जमीन के मालिकों का भी विवरण, उम्र, कारोबार आदि की जानकारी जुटाते थे।


नीरज देवी बनने वाली महिला की तलाश जारी

आरोपियों ने बताया कि नीरज देवी के रूप में उन्होंने खुर्जा की निवासी महिला सीमा को पेश किया था। पुलिस सीमा की भी तलाश कर ही है। वहीं खरीदार से लिए 21 लाख रुपये का आरोपियों ने आपस में बंटवारा किया। प्रथम भाटी के हिस्से में एक लाख रुपये आए थे। इस पैसे से उसने अपना मकान बवाने के लए ईंटें भी खरीद ली थीं। पैसा मिलते ही वह मकान बनाने की तैयारी में था।
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भूखंड के फर्जी मालिक बनकर और फर्जी कागजात तैयार करकर धोखाधड़़ी करने वाले सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का एक सदस्य फरार है। मामले की जांच जारी है। - अशोक कुमार, एडीसीपी
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