बिलासपुर। कस्बा बिलासपुर समेत आसपास के कई गांवों में बुखार व डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। बीते चार दिनों में चार लोगों की मौत हुई है। इनके डेंगू से पीड़ित होने की आशंका जताई जा रही है। इन मौतों के बाद ग्रामीणों में डर समा गया है। उन्होंने एंटी लार्वा के छिड़काव के साथ नियमित जांच शिविर लगाने की मांग की है। ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार शाम को नवादा निवासी 60 वर्षीय जग्गा जाटव की मौत हो गई। डेंगू के संभावित लक्षण होने पर बुलंदशहर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। इससे पहले इसी गांव में रहने वाली 12वीं की छात्रा मोनिका की डेंगू से मौत हो गई थी।
अस्तौली निवासी संजय और गढ़ी आजमपुर निवासी स्वराज की भी मौत हुई है। इनमें बुखार व सिर में दर्द के साथ जी मितलाने की शिकायत थी। ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षक समिति अध्यक्ष संजय नवादा के साथ प्राधिकरण अधिकारियों से मुलाकात कर एंटी लार्वा का छिड़काव व जांच शिविर लगाने की मांग की। इसके बाद बुधवार को गांव में शिविर लगाकर लोगों की जांच की गई। ग्रामीणों ने बताया कि गांव पीपलका, अमरपुर, राजपुर आदि में भी बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दनकौर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. नरेंद्र तिवारी व बिलासपुर स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. रमेश चावड़ा ने बताया कि नवादा में कैंप लगाकर 165 लोगों की जांच की गई। उन्हें दवा भी दी गई। जहां से शिकायत मिल रही है, उस गांव में शिविर लगाकर लोगों की जांच की जा रही है।
चौना गांव में भी संदिग्ध मरीज मौत
जारचा के चौना गांव में डेंगू के संदिग्ध मरीज मोहित (23) की सोमवार को मौत हो गई। वह एक सप्ताह से बीमार था। बुखार व बदन दर्द समेत अन्य डेंगू के संभावित लक्षण थे। दादरी के निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। जहां प्लेटलेट्स तेजी से गिरने के बाद रेफर कर दिया। परिजन उसे मेरठ ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। वह गाजियाबाद स्थित निजी कंपनी में नौकरी करता था। उसकी पत्नी गर्भवती है। एक दो साल का बेटा भी है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान व स्वास्थ्य विभाग से कैंप लगाने और एंटी लार्वा का छिड़काव कराने की मांग की है। वहीं, जेवर के वैश्य खटीक मोहल्ला निवासी आदर्श की 8 माह की पुत्री तनिष्क की बुखार से बृहस्पतिवार को मौत हो गई। परिजन ने बताया कि कस्बा के एक निजी अस्पताल से इलाज करा रहे थे, लेकिन बुखार कम नहीं हो रहा था।