ग्रेटर नोएडा। आश्वासन के बाद भी समाधान नहीं होने से नाराज किसान भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) अराजनीतिक के बैनर तलेट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर यमुना प्राधिकरण (यीडा) कार्यालय में दाखिल हो गए। किसानों ने यीडा दफ्तर पर ताला लगा दिया। देर शाम तक अधिकारी और कर्मचारी दफ्तर में ही फंसे रहे। वहीं देर शाम तक प्राधिकरण अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच चल रही वार्ता बेनतीजा रही। जिसके बाद किसान वहीं अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। देर शाम को प्राधिकरण कर्मियों को किसानों ने जाने दिया। हालांकि कर्मियों के वाहन कार्यालय में रह गए।
देर रात तक किसान कार्यालय पर जमे थे।
भाकियू (अराजनीतिक) के जिलाध्यक्ष अनित कसाना के नेतृत्व में सोमवार सुबह बड़ी संख्या में किसान यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो प्वाइंट पहुंचे। यहां से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर यीडा कार्यालय रवाना हुए। किसान नेताओं ने बताया कि 18 अक्तूबर को किसानों ने प्राधिकरण के बाहर धरना दिया था। तब अधिकारियों ने शासन से वार्ता कर उनकी मांगों को रखे जाने और 27 दिसंबर तक समाधान निकालने का आश्वासन दिया था। किसानों ने 68.7 फीसदी अतिरिक्त मुआवजा, 10 फीसदी आबादी वाले प्लॉट, बैकलीज, आबादी निस्तारण, मूल निवासियों को रोजगार, क्षेत्र में विकास कार्य का मुद्दा था। जिनकी आज तक सुनवाई नहीं हुई।
सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे ट्रैक्टर-ट्राली लेकर किसान यीडा परिसर पहुंचे। किसान यमुना प्राधिकरण के दफ्तर की ओर चले तो पुलिस फोर्स ने उनका रास्ता रोक लिया। इस दौरान काफी देर तक नारेबाजी, धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ। मौके पर किसानों को रोकने के लिए प्राधिकरण के सुरक्षाकर्मियों ने दोनों गेट पर ताले लगा दिए। वहीं, किसानों ने ताला लगा दिया। अधिकारियों के कहने के बाद भी उन्होंने ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दफ्तर परिसर से नहीं हटाए। इस दौरान मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश महासचिव पवन खटाना, जिलाध्यक्ष अनित कसाना, एनसीआर अध्यक्ष सुभाष चौधरी, मटरू नागर, सुनील प्रधान, परविंदर अवाना, संदीप अवाना, संदीप खटाना, सुमित तंवर, रविंद्र भगत, ज्ञानी सरपंच, शैलेंद्र बैसोया आदि किसान नेता मौजूद रहे।
दो दौर की चली बातचीत विफल
बाद में अधिकारियों ने कुछ किसान नेताओं को वार्ता के लिए बुलाया। देर शाम तक प्राधिकरण अधिकारियों और किसान नेताओं के बीच दो दौर में चली वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद किसानों ने अपनी पंचायत की। पंचायत में किसान नेताओं ने अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का फैसला किया है। मौके पर किसान यूनियन के कार्यकर्ता का धरना जारी रहा।
किसान विनाश बचाओ रैली से आंदोलनकारियों ने दिखाया दम
भारतीय किसान परिषद के नेतृत्व में नोएडा स्थित सेक्टर-6 प्राधिकरण पर चल रहा अनिश्चतकालीन धरना 118वें दिन भी जारी रहा। सोमवार को किसान विनाश बचाओ रैली निकाली गई। करीब ढाई घंटे तक जारी रही रैली में डीजे और ट्रैक्टर-ट्रालियों कार सवार किसानों ने दम दिखाया। किसानों की रैली शहर के जिन इलाकों से गुजरी वहां जाम लग गया।
दोपहर करीब ढाई बजे किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर तो कुछ पैदल ही सेक्टर-6 प्राधिकरण कार्यालय से निकले। रैली सेक्टर-5 हरौला, सेक्टर-19 के रास्ते सेक्टर-27 स्थित डीएम आवास पर पहुंची। यहां पर किसानों ने डीएम की अनुपस्थिति में सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद किसान सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद रैली सांसद कार्यालय के बाहर पहुंची। किसानों ने जमकर नारेबाजी कर प्रदर्शन जारी रहने की चेतावनी दी। किसानों की रैली निठारी गांव होते हुए सेक्टर-26 विधायक पंकज सिंह के कार्यालय पर पहुंची। वहां पर भी किसानों ने काफी देर तक रुककर प्रदर्शन किया।
किसान नेता सुखवीर खलीफा ने कहा कि 118 दिन हो गए हैं और प्राधिकरण-प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की ओर से अभी तक सिर्फ आश्वासन मिला है। किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर कुछ भी नहीं मिल पा रहा है। किसानों की लगातार तबियत खराब हो रही है। यदि किसी किसान के साथ कोई अनहोनी होती है तो उसके लिए जिम्मेदार प्राधिकरण और प्रशासन होगा। उन्होंने कहा कि यह रैली किसान विनाश बचाओ और किसान अस्तित्व बचाओ के लिए निकाली गई है। इससे जनप्रतिनिधियों को चेताया गया है। यदि उनकी समस्याएं फिर भी दूर न की गई तो आगामी समय में किसान कोई और कदम उठाएंगे।
सीएम साहब आप ही सुन लो हमारी
सेक्टर-27 स्थित डीएम कैंप आफिस पर सिटी मजिस्ट्रेट को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। सुधीर चौहान, प्रेमसिंह भाटी समेत कई किसानों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों से कई बार बात की गई है और अधिकारियों से भी वार्ता हो चुकी है। लेकिन कोई हल नहीं निकला है। इस बार किसानों ने सीएम से मिलने के लिए गुहार लगाई है।
डीएम चौके पर बैठ गए थे किसान
डीएम चौक पर किसान वहीं बैठ गए। जब तक किसानों का प्रतिनिधि मंडल डीएम कार्यालय में ज्ञापन देकर आया तब तक वहीं बैठे रहे। इस बीच अधिकारी परेशान रहे। अधिकारियों को आशंका थी कि कहीं किसान डीएम आवास को किसान घेराव न कर दें।