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नोएडा सीट पर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और गुर्जर जाति का चुनावी गणित

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नोएडा (संजय शिशौदिया)। देश की राजधानी से सटे और यूपी का प्रवेश द्वार कहे जाने वाली नोएडा सीट पर इस बार चुनाव काफी दिलचस्प होगा। भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर पार्टी जहां मौजूदा विधायक पंकज सिंह पर ही दांव लगाने की तैयारी कर रही है। वहीं, अन्य पार्टियां प्रत्याशी फाइनल करने से पहले जातीय समीकरण टटोल रही हैं।
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सपा, बसपा और कांग्रेस ठाकुर प्रत्याशी के मुकाबले ऐसे प्रत्याशी को उतारने की तैयारी में हैं, जा व्यक्तिगत स्तर पर भी जातिगत वोट बैंक को खींचने की हिम्मत रखता हो। 6.90 लाख वाली नोएडा विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा ब्राह्मण वोटर हैं। बसपा ने जहां पहले से ही अपने ब्राह्मण प्रत्याशी को लगभग फाइनल कर रखा है। वहीं, सपा और कांग्रेस के टिकट की दौड़ में भी सबसे ज्यादा ब्राह्मण प्रत्याशी ही शामिल हैं।
किस पार्टी के कौन दावेदार
भाजपा : पंकज सिंह, जुगराज चौहान, मनोज गुप्ता।
सपा-रालोद गठबंधन : योगेंद्र शर्मा, जगदीश शर्मा, अतुल शर्मा, पीतांबर शर्मा, सुनील चौधरी। सुनील ही गुर्जर जाति से हैं।
कांग्रेस : पंखुड़ी पाठक, प्रमोद शर्मा, अशोक शर्मा, सतेंद्र शर्मा ब्राह्मण हैं। सभी दावेदार रामकुमार तंवर, दिनेश अवाना, पुरुषोत्तम नागर, फिरे सिंह नागर, गौतम अवाना गुर्जर हैं। वैश्य जाति के अभिषेक जैन भी टिकट के दावेदारों की लाइन में हैं।
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बसपा : पार्टी ने कृपाराम शर्मा को फाइनल कर रखा है। हालांकि, अभी विधिवत घोषणा होनी बाकी है।
आम आदमी पार्टी : पंकज अवाना का नाम पार्टी पहले ही घोषित कर चुकी है।
नोएडा में मतदाता
पुुरुष - 3,91,460
महिला - 2,98,764
अन्य - 07
कुल मतदाता - 6,90,231
पार्टियों से पूछताछ पर आधारित जातिगत आंकड़े
- ब्राह्मण - 1.3 लाख
- बनिया - 1.1 लाख
- मुस्लिम - 70 हजार
- यादव - 40 हजार
- गुर्जर - 35 हजार
- ठाकुर - 25 हजार
शुरू से ही भाजपा का कब्जा
नोएडा विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह सीट दादरी विधानसभा में थी। 2012 में परिसीमन के बाद पहली बार भाजपा प्रत्याशी डॉ. महेश शर्मा विधायक बने थे। 2014 में डॉ. महेश शर्मा के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सीट खाली हो गई थी। उपचुनाव में भाजपा की ही विमला बाथम विधायक बनीं। 2017 के चुनाव में पंकज सिंह ने इस सीट पर कब्जा जमाया।
आप में जा सकते हैं भाजपा के एक नेता
कई नेता ऐसे भी हैं जो टिकट न मिलने पर बगावत कर सकते हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता आजकल चर्चाओं में हैं। पता चला है कि वे आकाओं से टिकट की दावेदारी कर चुके हैं, लेकिन अगर उनकी जगह पार्टी किसी अन्य को टिकट देती है तो वे आम आदमी पार्टी से जुड़ सकते हैं। पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच आजकल यह बात चर्चा का विषय है।
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