नोएडा। समय पर जांच नहीं कराने से आधे लोगों को मधुमेह से पीड़ित होने का पता भी नहीं चल पाता। देर से इलाज शुरू होने पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। एक सर्वे के मुताबिक शहर के हर दूसरे-तीसरे शख्स को उच्च रक्तचाप और मधुमेह की समस्या है। यहां तक की पुलिस की सेहत का मिजाज भी बिगड़ा हुआ है। ऐसे में जिलेभर के थानों में तैनात पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी।
एक निजी अस्पताल के गुड मॉर्निंग अभियान के तहत शहर के लगभग सभी सेक्टरों में सर्वे किया गया है। जांच के दौरान 50 फीसदी लोग उच्च रक्तचाप व मधुमेह से पीड़ित मिले। पेट्रोलिंग पर तैनात पुलिसकर्मियों में 80 फीसदी में भी यही समस्या पाई गई। अस्पताल प्रबंधन ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सामने जब यह तथ्य रखे तो जिले के सभी थानों में तैनात पुलिसकर्मियों की स्वास्थ्य जांच का अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।
कोरोना ने खड़ी की बड़ी समस्या
कोरोना के दौरान बच्चों के लिए भी बढ़ा खतरा पैदा हुआ है। लॉकडाउन में बच्चे घरों में कैद रहे, खेलकूद के अलावा आउटडोर गतिविधियां कम हो गईं। इससे बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ गई। शहर के साथ देहात में भी मधुमेह के रोगी सामने आ रहे हैं। महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। इसके पीछे आराम तलब जिंदगी और तनाव बड़ा कारण है। ऐसे मरीज जीवनशैली में बदलाव कर मधुमेह से बच सकते हैं।
मधुमेह के लक्षण - कमजोरी, मुंह सूखना, चक्कर आना, पैरों का सुन्न होना, बार-बार प्यास लगना, अचानक वजन कम होना, रात में बार-बार शौच आना।
इन्हें ज्यादा खतरा - परिवार के अन्य सदस्यों का मधुमेह से पीड़ित होना, अत्यधिक तनाव व वजन होना, कुर्सी पर ज्यादा देर तक बैठे रहना और व्यायाम न करना।
बचाव
- नियमित रूप से व्यायाम और योग करें
- संतुलित भोजन व डॉक्टरों की बताई गई दवाओं का सेवन करें
- 25 वर्ष के बाद प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में एक बार मधुमेह की जांच करानी चाहिए