नोएडा। दादरी से मुंबई तक बनाए जा रहे वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का काम तेजी से चल रहा है। कुल 1504 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर दादरी से रेवाड़ी सेक्शन का काम अंतिम दौर में पहुंच गया है। शनिवार रात से नोएडा मेट्रो रेल कारपोरेशन (एनएमआरसी) की एक्वा लाइन पर सेक्टर-145 से 146 मेट्रो स्टेशन के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए कार्य शुरू कर दिया है। एनएमआरसी की प्रबंध निदेशक रितु माहेश्वरी ने बताया कि मेट्रो लाइन के ऊपर फ्रेट कॉरिडोर की क्रासिंग का कार्य शुरू किया गया है। दीवारों का निर्माण डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) करेगी। गर्डर और डेक स्लैब का कार्य दो क्रेनों से किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया डीएफसीसीआईएल और एनएमआरसी की देखरेख में होगा। इससे एक्वा लाइन पर मेट्रो संचालन में कोई रुकावट नहीं होगी। यह कार्य रात में मेट्रो का परिचालन बंद होने के बाद होगा।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से यह होगा फायदा
कॉरिडोर के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में बनने वाली वस्तुएं और कृषि उत्पाद बेहद कम समय में सीधे मुंबई पहुंच सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ढुलाई का खर्च भी कम होगा। कॉरिडोर तैयार होने के बाद एक मालगाड़ी 13 हजार टन माल के साथ 100 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ढुलाई कर सकेगी। मौजूदा समय में एक मालगाड़ी 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की स्पीड से सिर्फ 5 हजार टन माल ही ढो पाती है।
कॉरिडोर पर दौडे़गी दो किलोमीटर लंबी मालगाड़ी
कॉरिडोर पर चलने वाली मालगाड़ी में दो किलोमीटर लंबी होगी। इसमें करीब 500 डिब्बे लगाए जा सकेंगे। कुछ लंबी डबल डेकर मालगाड़ियां भी संचालित की जाएंगी। कॉरिडोर का 18 किमी हिस्सा उत्तर प्रदेश, 177 किमी हिस्सा हरियाणा, 567 किमी हिस्सा राजस्थान, 565 किलोमीटर हिस्सा गुजरात और 177 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में होगा। ईस्टर्न और वेस्टर्न दोनों फ्रेट कॉरिडोर का मेन जंक्शन शादीपुर गांव के पास न्यू दादरी में होगा।
प्रशासन ने डीएफसीसी की जमीन पर मांगा कब्जा, किसान अड़े
जिला प्रशासन ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन (डीएफसीसी) के ईस्टर्न कॉरिडोर की जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास शुरू कर दिया है। शनिवार को दादरी तहसील और डीएफसीसी की टीम ने बोड़ाकी में किसानों से बात कर कब्जा देने की अपील की, लेकिन किसान मांग पूरी होने तक कब्जा नहीं देने पर अड़े रहे। प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि यह आखिरी प्रयास होगा। डीएफसीसी के ईस्टर्न कॉरिडोर के निर्माण का काम 95 प्रतिशत पूरा हो गया है, लेकिन बोड़ाकी और रिठौरी गांव में करीब 600 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने से कॉरिडोर पूरा नहीं हो सका है। एक साल की देरी हो चुकी है। किसान मकान की जगह दूसरा मकान, परिवार के हर बालिग सदस्य को नौकरी और चार गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने दोनों गांवों के किसानों से वार्ता शुरू की है। शनिवार को दादरी तहसील के उप जिलाधिकारी आलोक गुप्ता और डीएफसीसी के अधिकारी टीम के साथ बोड़ाकी गांव पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि गांव में करीब 300 वर्ग मीटर जमीन है। इस पर मकान बने हैं। मकान नहीं हटने के कारण कॉरिडोर का निर्माण रुका हुआ है। वहीं, रिठौरी में भी करीब 300 वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा लेना है। उन्होंने बताया कि किसानों से जमीन पर कब्जा देने की अपील की गई है, ताकि प्रोजेक्ट का निर्माण समय पर पूरा किया जा सके। वार्ता में किसान मांग पूरी होने पर ही कब्जा देने की बात पर अड़े रहे। प्रशासन की तरफ से यह आखिरी प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद प्रशासन रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई करेगा।