नई दिल्ली। एक बेटी ने अपनी मां की कोरोना महामारी की दूसरी लहर में मौत के लिए सरकार से मुआवजा मांगा है। याची की मां की कोविड-19 से मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की है। याची ने कहा है कि उसकी मां को बुखार समेत अन्य दिक्कतों के कारण सरोज मेडिकल इंस्टीट्यूट में 28 अप्रैल को भर्ती करवाया गया था। जब उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई तो उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
याची संतोष यादव की ओर से अधिवक्ता आनंद ने कहा कि याची की मां को गंभीर हालात में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में बिस्तरों की भारी किल्लत थी। इसलिए मरीज को किसी भी अन्य अस्पताल में बेड नहीं मिला। इससे याची की मां बिमला देवी की तीन मई को मृत्यु हो गई थी।
याची ने कहा कि वह एमसीडी से अपनी मां का मृत्यु प्रमाणपत्र भी नहीं बनवा पाई क्योंकि उसके भाई ने ही उसका सहयोग नहीं किया। याचिका में कहा गया है कि जीवन की क्षति होने पर वित्तीय सहायता प्रदान करना एनडीएमए की वैधानिक बाध्यता होने के साथ ही संविधानिक बाध्यता भी है क्योंकि इस मामले में संविधान के अंतर्गत प्रदत्त जीवन का अधिकार भी प्रभावित हुआ है।
याची ने इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया जिसमें एनडीएमए को कोरोना महामारी से मरने वालों के परिजनों के लिए मुआवजा तय करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया गया था। ये मुआवजा कितना होगा, ये तय करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने एनडीएमए पर छोड़ा था।