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नोएडा : दादी-नानी का स्वाद दिलाया याद, किचन में खोजी सेहत

Sun, 06 Mar 2022 05:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

नोएडा में आयोजित कुकिंग प्रतियोगिता ‘कहीं गुम ना हो जाए’ सीजन - 5 में 6 प्रतिभागियों को मिला अगले चरण में जाने का मौका।
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विजेता प्रतिभागी, शेफ और आयोजक... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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‘कहीं गुम ना हो जाए’ सीजन - 5 के तहत  ‘बूट अशरफी, दाल साटी का खाटा, बेर का शीरा, मुनक्का-बादाम का घोका, पमाई की खिचड़ी आदि व्यंजनों से  सेक्टर 135 स्थित देहात फार्म महक उठा था। इस कुकिंग प्रतियोगिता का मकसद घरों से गुम हो रहे दादी-नानी के पकवानों को फिर से हर घर में लाना और खाने संग सेहत के प्रति जागरूकता लाना है। प्रतिभागियों ने विभिन्न राज्यों के पारंपरिक पकवानों को पेश कर वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय सहयोगी की भूमिका में रहा, वहीं अमर उजाला ने मीडिया पार्टनर की भूमिका निभाई।

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 आयोजक अतुल सक्सेना ने बताया कि उनकी पत्नी बबीता हर साल इस तरह की प्रतियोगिता का आयोजन करती थी, ताकि परंपरागत स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा मिल सके, लेकिन पिछले साल कोरोना से उनकी मृत्यु हो गई। ऐसे में उनकी स्मृति में प्रतियोगिता आयोजित की है। हम अलग-अलग प्रदेशों से आए प्रतिभागियों को आयोजन में शामिल करते हैं। प्रतियोगिता कई चरणों में चलती है, जिसके तहत कुछ चुनिंदा प्रतिभागियों को उनकी एंट्री के आधार पर नोएडा राउंड में शामिल होने का मौका मिला। इसमें पंजाब, एमपी, यूपी, नेपाल आदि के परंपरागत खाने की थीम पर प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है। श्रेष्ठ रहे 6 प्रतिभागियों का चयन अगले चरण के लिए किया गया है।

खाने में स्वाद संग मिलेगी सेहत
प्रतिभागियों ने बताया की ज्यादातर रेसिपी दादी-नानी से सीखे हुए यानी परंपरागत हैं। इन रेसिपी में समय अधिक लगता है, इसलिए आज की पीढ़ी इन्हें भूलती जा रही है। स्वादिष्ट पकवानों से हम स्वाद संग अच्छी सेहत का आनंद ले सकते हैं। यूपी थीम पर स्टॅाल लगाने वाली प्रतिभागी नीता तंवर ने कहा, परंपरागत मसाले, मौसमी सब्जियों से बनी उनकी डिश सेहत को अच्छा रखने में बेहद मददगार हैं।
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वहीं विनती ने बताया कि वह पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक का स्वाद लेकर प्रतियोगिता में शामिल हुई हैं। फरीदाबाद की पारुल गोयल ने जच्चा की थाली के जरिए महिलाओं में गर्भावस्था के बाद खाने योग्य परंपरागत व्यंजनों का प्रदर्शन किया। नेपाली खाने के रूप में कार्यक्रम के दौरान कोदो को ढिड़ो, गुंद्रक को झोल, पालुंगो का साग जैसे व्यंजनों के स्वाद की खुशबू फैली। वहीं यूपी के परंपरागत खाने जैसे निमोना देखने को मिला।

यूपी के खाने संग चित्रा ने मारी बाजी
कार्यक्रम में खाने एवं परिधानों के लिए प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। परिधान कैटेगिरी में  दिव्या अरोड़ा, रितु घोष, शुभदीप गुप्ता को पुरस्कृत किया गया। खाने में 6 प्रतिभागियों को अगले राउंड के लिए चुना गया। इनमें  काजल शर्मा, नीता तंवर, पारुल गोयल, निशा चौहान, नीरू गोयल, चित्रा रावत शामिल रहे। तीसरे नंबर पर रही प्रतिभागी निशा चौहान ने मध्य प्रदेश के परंपरागत व्यंजनों को पेश कर जजों से सराहना पाई। वहीं, बेटे-बहू की वैवाहिक वर्षगांठ पार्टी को बीच में छोड़कर कार्यक्रम का हिस्सा बनी नीरू गोयल दूसरे नंबर पर रहीं। जबकि उत्तर प्रदेश के स्वादिष्ट व्यंजनों को पेश कर चित्रा रावत ने पहला स्थान पाया।

शेफ ने जानीं व्यंजनों की खूबियां
जज पैनल के तौर पर शेफ वैभव एवं विनीत मौजूद रहे। उन्होंने हर प्रतिभागी के स्टॉल पर जाकर उनके द्वारा प्रदर्शित व्यंजनों की खूबियां जानीं एवं चखकर स्वाद का जायजा लिया। दोनों शेफ ने कहा सभी प्रतिभागी बेहद हुनरमंद हैं। उनसे हमें कई नई चीजें सीखने को मिलंी। परंपरागत खानों से जुड़े विशेष गुण एवं स्वाद की बारीकियों पर भी चर्चा की गई।

जड़ों की ओर लौटने का प्रयास  
कार्यक्रम लेटस् गिव बैक - बैक टू रूट (जड़ से जुड़ें) थीम के तहत आयोजित हो रहा है, जिसे अलग अलग राज्यों में आयोजित किया जा रहा है।  हर राज्य से सर्वश्रेष्ठ पांरपरिक रेसिपी के विजेताओं की दिल्ली में फाइनल प्रतियोगिता होगी। संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार आतिथ्य सहयोगी है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम पुरस्कार विजेता को 21000 रुपये, द्वितीय को 15000 और तीसरे स्थान पर रहने वाले को 11000 हजार रुपये नकद के साथ आकर्षक उपहार भी दिए जाएंगे।

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