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वर्ल्ड लंग कैंसर डे: प्रदूषण और कोरोना का कॉकटेल बना खतरा, 10 साल में गौतमबुद्धनगर में तेजी से बढ़ेंगे मरीज

Wed, 31 Jul 2024 08:36 PM IST
नोएडा ब्यूरो माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा

सार

10 साल में गौतमबुद्ध नगर में तेजी से लंग कैंसर के मरीज बढ़ेंगे। हर साल 10 फीसदी से अधिक केस बढ़ रहे। बीड़ी-सिगरेट के साथ हुक्का भी मामले बढ़ाने में सहायक बन रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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2019 में कोरोना संक्रमण का सबसे अधिक असर फेफड़ों पर हुआ। फेफड़ों के टिश्यू में इससे काफी नुकसान हुआ। इसके साथ ही पूरे साल नोएडा, ग्रेटर नोएडा में प्रदूषित हवा ने खतरा और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगले 10 साल में गौतमबुद्ध नगर में लंग कैंसर के मरीज बढ़ सकते हैं।
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फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता का कहना है कि लंग कैंसर फेफड़ों में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण होता है। यह वृद्धि ट्यूमर का रूप ले सकती है। कोरोना के बाद कुछ लोगों में ब्रोंकिइक्टेसिस विकसित हो सकता है, जिसमें फेफड़ों के वायुमार्गों में स्थायी चौड़ीकरण और क्षति होती है। कुछ मामलों में संक्रमण के बाद फेफड़ों में फाइब्रोसिस बन गई, जिसने फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित किया। वायु प्रदूषण जिसमें पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण होते हैं, लंग कैंसर के खतरे को बढ़ा देते हैं। यह स्थिति फेफड़ों को और अधिक कमजोर कर सकती है। जोकि लंग कैंसर के विकास की संभावना बढ़ा देती है। ज्यादातर मरीजों में इसका पता आखिरी स्टेज पर चलता है।

फोर्टिस अस्पताल में पल्मोनरी के विशेषज्ञ डॉ. मयंक सक्सेना ने बताया कि कई शोध से यह साफ हो चुका है कि वायु प्रदूषण की वजह से लंग कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। धूम्रपान इसे और तेजी से बढ़ाएगा। यह एक आइसबर्ग जैसी अवस्था है जोकि वर्तमान में ज़्यादा ना दिख रही हो लेकिन आने वाला समय कठिन होगा। कोरोना को अभी तीन साल का समय ही गुजरा है। ऐसे में अभी इसकी वजह से लंग कैंसर होने पर शोध की जरूरत है।
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धूम्रपान से दूरी लंग कैंसर से बचाएगी
लंग कैंसर के प्रमुख कारणों में धूम्रपान सबसे बड़ा कारण है। सिगरेट, सिगार और पाइप सभी लंग कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। दूसरे व्यक्ति के धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आना भी लंग कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। वायु प्रदूषण जिसमें विशेष रूप से कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआं लंग कैंसर का प्रमुख कारण बन सकता है। इसमें शुरुआत में खांसी के लक्षण होते हैं। फिर बलगम के साथ खून आने लगता है। लोग इसे टीबी के लक्षण मानते हैं और वे कैंसर की जांच नहीं कराते। जबकि फेफड़ों के अंदर कैंसर विकसित हो रहा होता है। पहली और दूसरी स्टेज पर पहचान होने पर 70 से 80 फीसदी जिंदगी बचाई जा सकती है।

ऐसे पहचानें लंग कैंसर
- लगातार खांसी
- भूख की कमी से वजन गिरना
- खांसी के साथ बलगम में खून
- काले रंग का बलगम
- धीरे-धीरे आवाज का बैठना, बदलना

जिम्स में नहीं है लंग कैंसर के इलाज की व्यवस्था
लंग कैंसर के उपचार के लिए राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में कोई व्यवस्था ही नहीं है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां भी लंग कैंसर के मरीजों का इलाज संभव हो पाएगा। इसके लिए अगले दो वर्ष में कैंसर के इलाज की सुविधाओं को लेकर शासन से मांग की जाएगी। जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता लंग कैंसर की अभी सुविधा नहीं है। जांच के बाद मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद शासन से लंग कैंसर के इलाज की सुविधाओं की मांग की जाएगी।
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