पत्रकार से वार्ता करते उत्तर प्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य प्रियरंजन आशु।
नोएडा। अभियान ‘एक युद्ध नशे के विरुद्ध’ की रूपरेखा तय करने के लिए बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. प्रियरंजन आशु नोएडा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने महिला थाने का निरीक्षण किया। साथ ही पांच थानों के एसएचओ से उनके क्षेत्र में बाल अपराधों के बारे में जानकारी ली। बाल सुधारों की योजनाओं पर डॉ. प्रियरंजन ने कई निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा की। सेक्टर-39 स्थित बिजली घर के गेस्ट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि गौतमबुद्ध नगर सहित प्रदेश में जल्द ही बाल कल्याण और संरक्षण से जुड़ी नई योजनाओं पर काम शुरू होगा। आयोग को हर जिले में एक बाल थाना बनाने और हर थाने में बाल कल्याण अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव मिला है। इस पर जल्द कार्ययोजना बनेगी।
छह माह चलेगा अभियान
डॉ. प्रियरंजन ने बताया कि प्रदेश में बच्चों को नशे की लत से दूर रखने के लिए 6 माह तक ‘एक युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान चलेगा। इसके लिए 15 विभागों के अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाई जाएगी। बेघर और झुग्गियों में रहने वाले बच्चों पर खास ध्यान दिया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास नशे से जुड़ी दुकानें ना हों। दवा विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि बिना पर्चे के दवाएं न दें। नशीले असर वाली दवाओं की बिक्री संबंधी एक अलग रजिस्टर बनाएं। मानक अनुसार बोर्ड नहीं लगाने, शराब ठेकों पर 21 साल से कम आयु के कर्मचारी रखने और बच्चों को शराब बेचने वालों पर कार्रवाई होगी। शराब की दुकानों पर कैमरे और निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। किशोर न्याय अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाएगा।
सामूहिक प्रयास की जरूरत
डॉ. प्रियरंजन ने कहा कि बिना सामूहिक प्रयास के बाल कल्याण की मुहिम को मूर्त रूप देना मुश्किल है। सभी को जागरूक होना होगा। बाल अधिकारों के हनन की घटना सामने आने पर 1098 पर कॉल कर सूचित करें। शोषण का शिकार बच्चे भी इस हेल्पलाइन पर मदद मांग सकते हैं। आम लोगों को जोड़कर चिल्ड्रन पहरी नामक योजना भी चला रहे हैं। डॉ. आशु ने कहा कि इस समय ओटीटी प्लेटफॉर्म में दिखाया जा रही कुछ सामग्री बच्चों के लिए सही नहीं है। सरकार के स्तर पर ओटीटी सेंसरशिप पर विमर्श हो रहा है। अभिभावकों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
194 बच्चे हुए चिह्नित
वहीं, जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ. केसी विरमानी ने बताया कि जिले में 194 बेसहारा बच्चे चिह्नित कर पुनर्वास, बाल श्रम से मुक्ति और शिक्षण पर काम किया जा रहा है। बुधवार और बृहस्पतिवार को अलग-अलग स्थानों से 13 बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराया गया। जिले में बाल सुधार गृह बनाने की भी मांग की गई है।