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हैरानी: हेडफोन की दीवानगी से कान के कच्चे हो रहे बच्चे, सामने आए हैरान करने वाले आंकड़े

Thu, 04 Aug 2022 12:09 PM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

अस्पताल की कान, नाक और गला (ईएनटी) ओपीडी में परामर्श के लिए पहुंचे 31 हजार से अधिक मरीजों में से 7800 से अधिक 10 से 17 वर्ष के बच्चे-किशोर शामिल रहे। इनमें करीब 3200 बहरेपन की शुरुआती स्टेज पर मिले हैं, जबकि 800 में कान का पर्दा क्षतिग्रस्त मिला।
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विस्तार
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ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान मोबाइल और लैपटॉप पर हेडफोन व ईयरफोन लगाकर काम करने की मजबूरी अब लत में बदल गई है। हद से ज्यादा इन डिवाइस का इस्तेमाल बच्चों-किशोरों में सुनने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। जिला अस्पताल में रोजाना 20 से 25 ऐसे मामले आ रहे हैं। छह महीने के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। 

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अस्पताल की कान, नाक और गला (ईएनटी) ओपीडी में परामर्श के लिए पहुंचे 31 हजार से अधिक मरीजों में से 7800 से अधिक 10 से 17 वर्ष के बच्चे-किशोर शामिल रहे। इनमें करीब 3200 बहरेपन की शुरुआती स्टेज पर मिले हैं, जबकि 800 में कान का पर्दा क्षतिग्रस्त मिला। निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती है।

विशेषज्ञ इसे कोरोना काल में लगी मोबाइल की लत का दुष्प्रभाव बता रहे हैं। जिला अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. पीयूष दूबे ने बताया कि कुछ महीने में बच्चों में सुनने में परेशानी के मामले बढ़े हैं। कोरोना काल में मोबाइल का अत्यधिक इस्तेमाल इसकी सबसे बड़ी वजह है। कान के मध्य हिस्से, कान की नली में उत्पन्न पीड़ा और सूजन वाली स्थिति को ओटिटिस मीडिया कहा जाता है। 
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इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। बच्चों ओर वयस्कों में यह आम समस्या है, लेकिन कुछ महीने में बढ़े मामलों के बीच वजह तलाशने पर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। 80 प्रतिशत बच्चों में एक्यूट सुपरेटिव ओटिटिस मीडिया (एएसओएम) की पुष्टि हुई, जिसमें समस्या उत्पन्न होने के एक महीने के अंदर उपचार शुरू कर दिया गया।

वहीं, 20 फीसदी मामलों में एक महीने से अधिक समय तक समस्या बनी रहने पर कान में संक्रमण बढ़ने, पानी बहने और कान के पर्दे की झिल्ली को नुकसान पहुंचना पाया गया। यह क्रॉनिक सुपरेटिव ओटिटिस मीडिया (सीएसओएम) की श्रेणी में आता है। बैक्टीरियल इंफेक्शन के अलावा कान पर जोर से प्रहार करने पर यह स्थिति बन सकती है। इससे पीड़ित ज्यादातर बच्चों के अभिभावकों ने हेडफोन और ईयरफोन का दिन में चार से छह घंटे या इससे अधिक समय तक इस्तेमाल करने की पुष्टि की।

समस्या अस्थायी पर बन सकती है दुखदायी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुभाष गुप्ता ने बताया कि तेज आवाज में म्यूजिक सुनने से न सिर्फ कान, बल्कि दिल और मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ सकता है। वहीं, हेडफोन और ईयरफोन के इस्तेमाल से कान की नसें डेड होने का खतरा बढ़ता है।

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सात घंटे तक बढ़ा डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल
चाइल्ड पीजीआई के एक अध्ययन के मुताबिक, कोरोना से पहले 7 से 12 वर्ष की आयु के लगभग 30 प्रतिशत बच्चे दिन में औसत पांच घंटे डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करते थे। महामारी के बाद 10 से 12 घंटे प्रतिदिन इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्धारित आयु से एक वर्ष पहले ही 44 फीसदी बच्चों के हाथों में स्मार्ट फोन थमा दिए गए। इसका असर बच्चों की आंखों और कान पर पड़ा है।

बहरेपन के लक्षण
- कान में सीटी की आवाज सुनाई देना।
- चक्कर आना, नींद न आना, सिर दर्द।
- चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी व उच्च रक्तचाप।

बचाव
लंबे समय तक फोन पर बात करने से बचें, बहुत जरूरी होने पर ही हेडफोन व ईयरफोन का इस्तेमाल करें, 10 से 20 मिनट का ब्रेक लेते रहें और कम आवाज रखें।
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