फेज थ्री कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-63 में दो दोस्तों ने मिलकर कार सर्विस यात्रा कंपनी बनाई और कुछ ही दिन में पैसा लगाने वालों की संख्या बढ़ गई, लेकिन दोनों में पैसे के बंटवारे पर विवाद होने लगा। दोनों पैसों को अपने-अपने खाते में ट्रांसफर करा लेते थे। दीपक ने अधिक पैसे बैंक से अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए थे। इस बात पर दोनों में विवाद हुआ और फिर मामला फेज-थ्री कोतवाली पहुंच गया।
लोकपाल ने दीपक पर कंपनी में धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। पुलिस अभी मामले में जांच कर ही रही थी कि पीड़िता रितु चौधरी ने थाने में करोड़ों की ठगी की शिकायत दे दी। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया तो पूरा मामला खुलता चला गया। पुलिस आयुक्त ने मामले में गंभीरता से जांच के निर्देश दिए थे।
आरोपी दीपक ने शुरुआत में कंपनी बनाकर लोगों को अपने रहने और शौक के तरीके से प्रभावित किया। उसके लिए नई-नई गाड़ियां और महंगे मोबाइल के अलावा किसी भी सोसाइटी के व्यक्ति पर दो-चार हजार रुपये खर्च करना आम बात थी। इससे सोसाइटी के लोग दीपक के परिवार को अमीर मानते थे। उनके दो फ्लैट थे और दो साल बाद ही उन्होंने एनआरआई सोसाइटी में भी फ्लैट लेकर रहना शुरू कर दिया था।
मुंहबोली बहन बनाकर ठगा
एक व्यक्ति से एक कार के एवज में तीन लाख रुपये लिए जाते थे। इसके बाद उसे 25 हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया जाता था। जबकि आरोपी कार की किस्त भी स्वयं देने का वादा करते थे और चार से पांच साल का ठेका करते थे। इस तरह रितु चौधरी ने अपने मायके-ससुराल के लोगों और दोस्त 27 लोगों से तीन-तीन लाख रुपये लगवा दिए थे। रितु भी परिवार के साथ आरोपियों की ही सोसाइटी में रहती है। दीपक ने रितु को मुंहबोली बहन बना लिया था और परिवार से गहरी दोस्ती भी कर ली थी।
पूरा परिवार ठगी के इस खेल में शामिल
एडीसीपी सेंट्रल जोन अंकुर अग्रवाल ने बताया कि पीड़िता की तहरीर पर दीपक चौधरी, मां पुष्पा, पत्नी रुही, ससुर संतोष कुमार मलिक, मामा विपिन तोमर, दोस्त लोकपाल के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें संतोष लखनऊ के पशुपालन विभाग में निदेशक है। जब दीपक किसी को विश्वास नहीं दिला पाता था तो ससुर से फोन पर बात करा देता था। संतोष बात करके मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से वार्ता होने का दावा करता था। पीड़िता का आरोप है कि दीपक पर जब उसे विश्वास नहीं हुआ तो दीपक उन्हें व दो और लोगों को लखनऊ अपने ससुर से मिलवाने के लिए लेकर गया था।
रितु के नाम से भी बनवाई फर्जी कंपनी
रितु ने बताया कि उसे लखनऊ में बाइक टैक्सी के नाम पर ठेका दिलाने की बात कही गई थी। वह कार यात्रा के कांट्रेक्ट को पूरा करने में लगे हुए थे इसलिए फर्जी तरीके से बाइक कंपनी के लिए रितु के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया और मामा के गाजियाबाद स्थित पते पर उसका गलत तरीके से खाता खुलवा दिया, लेकिन पैसा निकालने का अधिकार नहीं दिया गया। रितु ने बताया कि उसे फंसाने के लिए दीपक ने ऐसा किया था। 6 जनवरी 2021 को (गर्व भारत इनोवेशन) ई- बाइक के नाम से बनाई कंपनी के लिए 61.50 लाख जमा किए थे।
सोसाइटी के तीन लोगों को बनाया शिकार
ग्रेटर नोएडा के स्टेलर एमआई सिटी में आरोपियों ने दो फ्लैट ले रखे थे और एनआरआई सिटी में रहते थे। इन दोनों फ्लैट में अब तो कभी-कभी ही आते थे। इसी सोसाइटी में रहने वाले डॉ. इंद्रजीत सिंह भाटी ने बताया कि उसके फ्लैट के सामने ही आरोपियों का फ्लैट था। पहले दोस्ती की और फिर उससे 20 लाख रुपये इस फर्म में लगवा दिए। हर माह 25-25 हजार रुपये देने का वादा किया था, लेकिन एक माह भी नहीं दिए।
आगरा के ऑफिस का उद्घाटन मंत्री की शक्ल जैसे व्यक्ति से करवाया
आरोपी दीपक ने आगरा में भी लोगों को ठगने के लिए मार्च में आफिस खोला था। इसमें राज्य के एक मंत्री की शक्ल जैसा व्यक्ति बुलाकर उससे फीता कटवाया था। उस फोटो को मंत्री बताकर लोगों के साथ विश्वास कराने के लिए प्रयोग करता था। दीपक ने मुख्यमंत्री कार्यालय में अपने ससुर के साथ जाकर फोटो खींच लिए थे, ताकि लोगों को दिखाया जाता था कि वह काम से सीएम से मिलने के लिए गया है।