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खरीदारों को भुगतना पड़ता है नापाक गठजोड़ का नतीजा: सुप्रीम कोर्ट

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खरीदारों को भुगतना पड़ता है नापाक गठजोड़ का नतीजा: सुप्रीम कोर्ट
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शीर्ष अदालत ने कहा, नोएडा के अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन सही
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के टावर गिराने का फैसला सुनाते हुए कहा, यह दुर्भाग्य है कि फ्लैट खरीदारों को बिल्डरों और योजनाकारों के बीच नापाक गठजोड़ का परिणाम भुगतना पड़ता है। उनके जीवन की गुणवत्ता सबसे अधिक प्रभावित होती है। डेवलपर की आर्थिक ताकत और नियोजन निकायों द्वारा संचालित कानूनी अधिकार की ताकत के खिलाफ जो कुछ लोग आवाज उठाते हैं, उन्हें लंबी खर्चीली कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। इसलिए उनकी चिंताओं की रक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक मामले में हाईकोर्ट के उस निर्देश की पुष्टि की है, जिसमें सक्षम प्राधिकारी को नोएडा के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हम अपीलकर्ता के अधिकारियों और नोएडा के अधिकारियों के खिलाफ यूपीयूडी अधिनियम की धारा-49 के तहत मुकदमा चलाने के हाईकोर्ट के आदेश की पुष्टि करते हैं।
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कोर्ट ने कहा कि अक्सर नियामक अधिकारियों की मिलीभगत से डेवलपर द्वारा नियमों का बेशर्मी से उल्लंघन किया जाता है, जो शहरी नियोजन के मूल पर हमला है। इससे सीधे पर्यावरण को नुकसान होता है और सुरक्षा मानकों में कमी आती है। इसलिए अवैध निर्माण से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पिछले चार दशकों से यह न्यायालय, योजना निकायों को भवन योजनाओं को मंजूरी देने, भवन नियमों और उप-नियमों को उन मानदंडों के अनुरूप लागू करने पर जोर देता रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के 40 मंजिला टावरों के ध्वस्तीकरण आदेश से एसोसिएशन खुश है। सच्चाई की जीत हुई है। हमें जब नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण की जानकारी मिली थी, तब से ही हम बिल्डर के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। अब हमें न्याय मिला है। - एसके शर्मा, अध्यक्ष, एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए
ट्वीन टावर को गिराने के आदेश के मामले में कंपनी पुनर्विचार याचिका दायर करेगी। दोनों टावर सुपरटेेक के एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। - मोहित अरोड़ा, एमडी, सुपरटेक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। आदेश की कॉपी मिलने के बाद अध्ययन किया जाएगा। फिर एसीईओ की अध्यक्षता में कमेटी विभागीय जांच करेगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। - रितु माहेश्वरी, सीईओ, नोएडा प्राधिकरण
बिल्डर और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा प्राधिकरण
नोएडा। सेक्टर-93ए के सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 40 मंजिला ट्विन टावर गिराने के आदेश दिए हैं। इस मामले में प्राधिकरण के एसीईओ की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर विभागीय जांच होगी। इसके बाद बिल्डर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा। इसमें कोर्ट की ओर से एक-एक बिंदुओं पर उठाए गए सवाल और बताई गई कमियों की जांच होगी। ट्विन टावर 16 (एपेक्स) और 17 (स्यान) को केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) या विशेषज्ञ संस्था से तीन माह में ध्वस्त करा दिया जाएगा। मामले में पहले की सुनवाई के समय समस्त तथ्यों से अधिकारियों को अवगत नहीं कराने से नियोजन विभाग के दोषी कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगा सुपरटेक
नोएडा। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मंगलवार को सेक्टर-93ए एमेराल्ड कोर्ट के 40 मंजिला ट्विन टावर को गिराने का आदेश आया है। इस मामले में सुपरटेक अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डालेगा। सुपरटेक के एमडी मोहित अरोड़ा ने बताया कि कंपनी की ओर से कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी।
दरअसल, बिल्डिंग बॉयलॉज का उल्लंघन करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया है। कोर्ट की ओर से केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) को टावरों को गिराने को कहा है। यह प्राधिकरण के अधिकारियों की देखरेख में होगा।
सीईओ रितु माहेश्वरी का कहना है कि अगर सीबीआरआई यह काम नहीं कर पाती है तो किसी विशेषज्ञ संस्था से तीन माह में टावरों का ध्वस्तीकरण कराया जाएगा। इस मामले में कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण को किसी भी संस्था को चयनित करने की छूट दे रखी है।
‘40 मंजिला इमारत खड़ी हो गई, कहां सोया था प्राधिकरण’
नोएडा। ‘सुपरटेक के ट्वीन टावर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। इससे कई साल की लंबी लड़ाई लड़ने वाले खरीदारों को निश्चित ही राहत मिलेगी। इस प्रकरण में प्राधिकरण के उन अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जिनके कार्यकाल में यह 40 मंजिला इमारत खड़ी हो गई और वह सोते रहे। आज हम अपने घर के सामने सिर्फ 100 ईंट उतरवाकर रख लें तो पुलिस और प्राधिकरण दोनों विभागों के कर्मचारी घर पहुंचकर पूछताछ शुरू कर देते हैं। सुपरटेक ने इतनी ऊंची इमारतें तैयार कर दीं और किसी को पता नहीं चला, यह बात हजम नहीं होती।’ सुपरटेक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के तत्काल बाद यह बातें आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. अरविंद गुप्ता ने की।
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डॉ. गुप्ता ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि जिस जनता के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाए गए हैं, आज वही जनता बिल्डर, नेता और माफिया गठजोड़ का शिकार होकर परेशान हो रही है। लोग अपना आशियाना बनाने में पूरी जिंदगी की कमाई लगा देते हैं। बैंकों से लोन लेते हैं और कई साल तक लोन की किश्त चुकाने के बावजूद उन्हें घर नहीं मिलता। यह बात सोचने वाली है कि आखिर इस बिल्डर की करतूत में प्राधिकरण के किन-किन अधिकारियों ने साथ दिया। उनके नाम भी उजागर होने चाहिए। जनता के पैसे से बिल्डर इधर से उधर टोपी पहनाने का काम करता रहा और अधिकारी आंख मूंदे रहे।
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