डिजिटल विश्वविद्यालय पर गरीब परिवारों का कहना है कि हमारे बच्चों के पास पढ़ने के लिए मोबाइल नहीं है और बात डिजिटल विवि बनाने की हो रही है। संसाधन के अभाव में कई बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़कर कूड़ा बीनने को मजबूर हैं।
वित्तमंत्री ने बजट पेश करने के दौरान अपने भाषण में देश में डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना की बात कही है। यह निर्णय शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ ही कोरोना काल में शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने से पढ़ाई में हुए नुकसान को देखते हुए लिया गया है।
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सरकार के इस निर्णय को लेकर भी खासी चर्चा रही। सबसे अधिक गरीब तबका परेशान है। इनका कहना है कि हमारे बच्चों के पास पढ़ने के लिए मोबाइल नहीं है और बात डिजिटल विवि बनाने की हो रही है। संसाधन के अभाव में कई बच्चे बीच में ही स्कूल छोड़कर कूड़ा बीनने को मजबूर हैं। ऐसे में सरकार को पहले गरीब तबके को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना होगा, तभी डिजिटल विश्वविद्यालय का उद्देश्य साकार हो सकेगा।
लॉकडाउन के बाद से स्कूल नहीं जा सके साहिल और विजय, बीन रहे कूड़ा
बजट के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि पीएम ई-विद्या योजना के तहत एक चैनल एक क्लास को 12 से 200 टीवी चैनल तक बढ़ाया जाएगा। स्कूल छोड़कर कबाड़ बीनने वाले नौ वर्षीय साहिल का कहना है कि हर घर टीवी नहीं खरीद सकता है। साहिल के माता-पिता का कहना है कि सरकार को पहले गरीबों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना होगा, तभी इन योजनाओं का लाभ उन्हें मिल पाएगा। उन्होंने बताया कि साहिल का बड़ा भाई विजय भी कबाड़ बीनता है। लॉकडाउन के बाद से स्कूल नहीं गया है। हम अभी डिजिटल शिक्षा के लिए टीवी या मोबाइल खरीदने की स्थिति में नहीं है। साहिल ने पांचवीं और विजय ने आठवीं के बाद पढ़ना छोड़ दिया।
पूजा के घर में नहीं है दो वक्त की रोटी, पढ़ाई छोड़ बेच रही पेन
दस वर्षीय पूजा का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि खाने के लिए दो वक्त रोटी तक नहीं है। ऐसे में पढ़ने के लिए मोबाइल, टीवी कैसे आएगी। पढ़ाई छोड़कर पेन बेच रही हूं। शिक्षा हासिल करना चाहती हूं। इसलिए पेन का साथ नहीं छोड़ा है। पूजा की मां कहना है कि उम्मीद है एक बजट ऐसा भी आएगा, जिसमें जिन बच्चों के पास मोबाइल और टीवी नहीं है, उनकी सहायता की जाएगी। जिन बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है, वह फिर से दाखिला पा सकेंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल विवि का सपना तभी सफल होगा, जब संसाधनों के अभाव को दूर किया जाएगा। देश में कितने बच्चों के पास पढ़ाई के लिए मोबाइल या टीवी की सुविधा है, इसका जवाब सरकार के पास भी नहीं है।