-एम3एम की सहायक कंपनियों के आवंटन को शासन ने किया है निरस्त
-अब प्राधिकरण की ओर से आदेश का किया जाएगा पालन
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-72 और 94 में एम3एम की दो सहायक कंपनियों स्काईलाइन प्रोपकॉन प्राइवेट लिमिटेड और लैविश बिल्डमार्ट प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित किए गए प्लॉट के निरस्तीकरण के बाद अब प्राधिकरण इस पर कब्जा लेगा। यूपी शासन की ओर से निरस्तीकरण आदेश जारी करने के बाद आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। ब्रोशर की शर्तों के इतर दोनों प्लॉट आवंटित करने का आरोप है। इस मामले में शिकायत के बाद प्राधिकरण स्तर पर इसकी जांच भी की गई थी। प्राधिकरण की ओर से रिपोर्ट देने के बाद शासन ने यह कार्रवाई की है।
प्राधिकरण के सूत्रों के मुताबिक प्रमुख सचिव अनिल सागर की ओर से जारी किए गए आदेशों में बताया गया है कि दोनों प्लॉटों के आवंटन के दौरान सहायक कंपनियों के जो मानक तय किए गए हैं उनका पालन नहीं किया गया। इसके अलावा इसकी बोली पर भी सवाल उठाए गए हैं। बताया जा रहा है कि बोली लगाने के दौरान रिजर्व प्राइस से केवल 5 लाख की अधिक बोली पर जमीन का आवंटन कर दिया गया। इसमें किसी तरह की प्रतिस्पर्धा नहीं हो पाई। इन सभी बिंदुओं पर शिकायत हुई थी। इसके बाद शासन स्तर पर भी इसकी जांच की गई। हालांकि एम3एम की ओर से इस तरह के फैसले पर नाखुशी जताई गई है। उनका कहना है कि पक्ष जाने बिना इस तरह की कार्रवाई की गई।
सेक्टर-72 का तीन एकड़ के प्लॉट की कीमत 176.5 करोड़ और सेक्टर-94 के 13 एकड़ के प्लॉट की कीमत 827.3 करोड़ रुपए थी। इसका आवंटन फरवरी 2023 और नवंबर 2022 में किया गया।
आवंटन निरस्त होने से फसेंगे निवेशक
एम3एम के अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं में बुकिंग भी हो चुकी है। इसके अलावा प्राधिकरण को भी पैसे जमा कराए गए हैं। परियोजना का आवंटन निरस्त करने की वजह से इसमें निवेशक फंसेंगे। ऐसे में शासन और प्राधिकरण को इस फैसले के बाबत एक बार फिर से सोचना चाहिए ताकि निवेशकों का नुकसान न हो।
इन्वेस्टर समिट में किया 7500 करोड़ का एमओयू
बीते वर्ष यूपी इन्वेस्टर समिट में एम3एम की ओर से इन प्रोजेक्टों को आधार बनाते हुए 7500 करोड़ के एमओयू पर साइन किया गया था। इन्वेस्ट समिट में बताया गया था कि इसके माध्यम से नोएडा में बड़ा निवेश किया जाएगा। अब जबकि आवंटन निरस्त किया गया है तो इससे यह निवेश भी प्रभावित होगा।