सीएजी ऑडिट के बाद से ही रडार पर आ गए थे प्राधिकरण के अधिकारी
-पीएसी की सुनवाई में आपत्तियों पर हो रही चर्चा में प्राधिकरण के वर्तमान अधिकारी दे रहे सवालों के जवाब
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन और सीईओ मोहिंदर सिंह के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापा मारने की पटकथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ऑडिट के बाद ही लिख दी गई थी। सितंबर 2021 में सीएजी ऑडिट के बाद प्राधिकरण के ऐसे अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग भी की गई थी। उस समय सरकार ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
इसी कड़ी में हाल ही में सीएजी आपत्तियों पर लोकलेखा समिति (पीएसी) की सुनवाई चल रही है। इसमें उन आपत्तियों पर चर्चा चल रही है। इसमें नोएडा प्राधिकरण के वर्तमान अधिकारी सवालों के जवाब दे रहे हैं। इस सुनवाई में पुराने घाव भी उभर रहे हैं। पीएसी की ओर से कई मामलों पर प्राधिकरण से यह उम्मीद की गई है कि इसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के नाम सामने आए।
इसी कड़ी में 2005 से 2017 तक किए गए ऑडिट रिपोर्ट में ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यिक, संस्थागत, नियोजन, औद्योगिक विभाग समेत दूसरे अन्य विभागों के प्लॉट आवंटन और नियमों से इतर किए गए कार्यों की सूची भी बनी थी। इस पर चर्चा में यह भी सामने आया था कि चाहे स्पोर्ट्स सिटी हो या फिर बिल्डर मामले में जमीनों का आवंटन, सभी में काफी अनियमितताएं हैं। नोएडा प्राधिकरण की पॉलिसी पर भी सवाल उठाए गए थे।
इन सभी मामलों के खुलने के अलावा हाईकोर्ट ने हैसिंडा प्रोजेक्ट की अलग से ईडी की जांच के आदेश दिए। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि ईडी ने कई बिल्डरों के मामले में प्राधिकरण के आलाधिकारियों से पहले भी जानकारी मांगी थी। प्राधिकरण ने वह जानकारी गोपनीय आधार पर ईडी को सौंप दी। इसके अलावा जरूरत के हिसाब से यह जानकारी अभी भी दी जा रही है। हाल ही में नोएडा के एक नामचीन बिल्डर की जानकारी भी ईडी ने मांगी है। इसमें प्लॉट आवंटन से लेकर बकाये तक की जानकारी दी जा रही है।
गंभीरता से जांच होने पर कई बड़े मामलों में बड़ी मछलियों के फंसने की उम्मीद है। ईडी ने एक सिरा पकड़ा है तो इससे और भी कई कड़ियां जुड़ती जाएंगी।