प्रसिद्ध नृत्यांगना माया कुलश्रेष्ठ और साथ ही साथ अंजना वेलफेयर सोसायटी की सह फाउंडर का मानना है कि युवाओं में जब तक स्वयं को निखारने की बात नहीं आएगी तब तक वह किसी भी क्षेत्र में अपने आप को स्थापित नहीं कर सकते।
यूं तो हम कला महोत्सव का भी आयोजन करते हैं जिसमें युवा कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं, पर प्रतियोगिताओं के माध्यम कलाओं का विकास होता है, कलाकारों का विकास है। इसके माध्यम से स्वयं पर और मेहनत करने का मन करता है।
आज के इस प्रतियोगी समाज में खुद को कैसे विजेता की तरह से रखा जाए वह समझ आता है। इस तरह की प्रतियोगिता बच्चों का युवाओं का बल्कि कहीं ना कहीं सभी बौद्धिक वर्ग का विकास करती है। प्रतियोगिताएं जीवन में ऊर्जा प्रदान करती हैं और साथ ही साथ आप संभलते गिरते उठते जीवन को महसूस कर पाते हैं।