फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहले दिन गेहूं खरीद के लिए नहीं पहुंची एजेंसियां

विज्ञापन
विज्ञापन
पुन्हाना। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार से मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू कर दी है, लेकिन पुन्हाना की अनाज मंडी में कोई सरकारी एजेंसी खरीद के लिए नहीं पहुंची। इस कारण किसान भी गेहूं लेकर नहीं पहुंचे। जबकि पिछले वर्ष पुन्हाना अनाज मंडी में 6.89 लाख क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद की गई थी।
विज्ञापन

पुन्हाना मार्केट कमेटी के सचिव दीपक ने बताया कि अनाज मंडी में गेहूं खरीदने की पूरी तैयारी है। यहां पर बिजली, पीने के पानी आदि की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि पुन्हाना में वेयर हाउस और एफसीआई एजेंसियों को गेहूं की सरकारी खरीद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों एजेंसियां सप्ताह में तीन-तीन दिन खरीद करेंगी। इसके अलावा पिनगवां अनाज मंडी में हर वर्ष तरह इस बार भी एफसीआई एजेंसी ही खरीद कर रही है। उन्होंने बताया कि मंडी में वारदाना आ गया है। शुक्रवार शाम तक खरीद एजेंसियों के अधिकारी मंडी पहुंच जाएंगी। पिछले वर्ष पुन्हाना अनाज मंडी में 6 लाख 89 हजार क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद की गई थी। इस बार पुन्हाना और पिनगवां के किसानों ने करीब 30 हजार एकड़ गेहूं का रजिस्ट्रेशन कराया है। अभी कितना सत्यापन हुआ है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया है कि वे अपनी बारी के अनुसार ही मंडी में गेहूं लेकर आएं, जिससे जाम आदि की समस्या से बच सकें।
तावडू में 116 क्विंटल खरीद हुई
तावडू। अनाज मंडी में पहले दिन गेहूं की आवक उम्मीद के अनुसार कम रही। तावडू मार्केट के सचिव मोहन जोयल ने बताया कि सरकारी एजेंसी गेहूं की खरीद करें या व्यापारी उनका एक ही मकसद है कि किसानों को उनकी फसल के ज्यादा से ज्यादा दाम मिलें। इस बार केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसमें हैफेड व हरियाणा भंडारण निगम एजेंसी द्वारा गेहूं की सरकारी खरीद की जाएगी। गेहूं खरीद की तैयारियों को लेकर सुबह 10 बजे से ही मंडी प्रशासन के अलावा हैफेड प्रबंधक नीरज यादव व खाद्य आपूर्ति निरीक्षक निकेश कुमार मंडी में मौजूद रहे। पहले दिन गेहूं की 116 क्विंटल खरीद हुई। हैफेड प्रबंधक नीरज यादव ने बताया कि व्यापारियों की बोली का वह इंतजार कर रहे हैं। यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बोली लगती है तो व्यापारी खरीद लेंगे अन्यथा उनकी एजेंसी गेहूं खरीदेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें