ग्रेटर नोएडा। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वंदिता श्रीवास्तव की कोर्ट ने छपरौला गांव में 45 बीघा जमीन के पट्टों को निरस्त कर दिया है। 47 साल पहले चारागाह की जमीन का भू-उपयोग (लैंड यूज) नियमों के खिलाफ बदल दिया गया था और एक सब इंस्पेक्टर के परिजनों के नाम पट्टे आवंटित कर दिए गए थे। एडीएम कोर्ट ने तहसील दादरी को जमीन पर कब्जा लेने का भी आदेश दिया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) चरणजीत नागर ने बताया कि वर्ष 1974 में छपरौला गांव के खाता नंबर 376, 377 व 396 की 45 बीघा जमीन चारागाह में दर्ज थी, लेकिन तहसील दादरी से जमीन का भू-उपयोग बदल दिया गया। भू-उपयोग चारागाह से बदलकर बंजर दिखाया गया, जबकि चारागाह की जमीन पर पट्टे नहीं हो सकते। उस समय छपरौला चौकी के तत्कालीन प्रभारी सब इंस्पेक्टर जयनंद त्यागी की पत्नी शिक्षा देवी और भाई रामानंद त्यागी के नाम पर पट्टों का आवंटन कर दिया गया।
अपर जिलाधिकारी (भू-अधिपत्य) ने जांच के बाद पट्टों का आवंटन गलत पाया और 45 बीघा जमीन के पट्टों को निरस्त कर दिया। पट्टाधारियों ने इस आदेश को न्यायालय अपर आयुक्त मेरठ में चुनौती दी। वर्ष 2016 में न्यायालय अपर आयुक्त ने अपर जिलाधिकारी (भू-अधिपत्य) के आदेश को निरस्त कर दिया और फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया, तब से यह मामला न्यायालय अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) में विचाराधीन था। सभी पक्ष सुनने के बाद न्यायालय अपर जिलाधिकारी वंदिता श्रीवास्तव ने माना कि नियमों के खिलाफ जाकर पट्टों का आवंटन किया गया था। 45 बीघा जमीन के पट्टों को निरस्त कर दिया गया है। साथ ही, इस भूमि को फिर से चारागाह में दर्ज कर दिया है। तहसील दादरी को जमीन खाली करानी होगी।