ग्रेटर नोएडा। जिला प्रशासन अब बकायेदार बिल्डरों की योग्य संपत्ति को ही कुर्क करेगा, ताकि ई-नीलाम करने में किसी तरह की अड़चन नहीं आए। अमर उजाला ने 21 मार्च को ‘ई-नीलामी में खरीदी संपत्ति पर नहीं मिलेगा मालिकाना हक’ शीर्षक के साथ यह मुद्दा उठाया था। इसके बाद प्रशासन ने यह फैसला लिया है। ज्यादातर बिल्डरों की संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। इसका कारण आक्यूपेंसी या कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिलना है।
जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) के रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) पर वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है, जो बिल्डर आरसी का पैसा नहीं दे रहे हं, उनकी संपत्ति को कुर्क किया जा रहा है। अभी तक प्रशासन करीब 400 करोड़ की संपत्ति को कुर्क कर चुका है। इसमें से 382 करोड़ की संपत्ति को ई-नीलाम करने की तैयारी चल रही है, लेकिन ज्यादातर संपत्ति उन प्रोजेक्ट में हैं जहां पर बिल्डर को संबंधित प्राधिकरण से आक्यूपेंसी या कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है। ऐसे में अगर जिला प्रशासन इन संपत्ति को ई-नीलाम करता है तो मालिकाना हक देना मुश्किल होगा। खरीदार के नाम रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी। अब प्रशासन केवल साफ-सुथरी यानी योग्य संपत्ति को ही कुर्क करेगा। वहीं, अभी तक कुर्क की जा चुकी संपत्ति का आकलन भी शुरू कर दिया गया है जो अच्छी संपत्ति होगी, उसे पहले चरण की ई-नीलामी में शामिल किया जाएगा।
टीम को लानी होगी संपत्ति की फोटो
तहसील की टीम बिल्डर की संपत्ति कुर्क करती है। सभी टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे साफ-सुथरी संपत्ति को ही कुर्क करें। कुर्क करते समय यह देखा जाए कि संपत्ति पर किसी तरह का विवाद तो नहीं है। सभी सुविधाएं हैं या नहीं। कुर्क की जाने वाली संपत्ति का फोटो भी लें, ताकि भविष्य में उसका इस्तेमाल किया जा सके।
कई जगह लिफ्ट है और न ही सीढ़ियां
जिला प्रशासन ने विभिन्न बिल्डरों के 200 से अधिक फ्लैटों को जब्त किया हुआ है। इनमें काफी फ्लैट ऐसे टावर में हैं, जहां पर अभी तक लिफ्ट नहीं लगी है जबकि कई जगह पर लिफ्ट के साथ-साथ सीढ़ियां भी नहीं बनी हैं। ऐसे में इन फ्लैटों की रजिस्ट्री होना मुमकिन नहीं है।
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अब बिल्डरों की उन संपत्ति को कुर्क किया जाएगा, जो अच्छे प्रोजेक्ट में होंगी। इससे उनकी रजिस्ट्री हो सकेगी। सभी टीम को इस संबंध में निर्देशित किया गया है।
- अंकित कुमार, एसडीएम सदर