नोएडा। बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) के लिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ठगने वाले गिरोह का कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने सेक्टर-62 में चल रही फर्जी कंपनी के एचआर मैनेजर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन महिलाएं शामिल हैं, जबकि सरगना समेत 11 आरोपी फरार हैं। गिरोह ने 50 से अधिक लोगों से ठगी की है और सभी से दस लाख से पचास लाख रुपये तक लिए हैं।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि पुलिस ने बुधवार को सेक्टर-62 स्थित आइथम टावर से पांच लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी करियर एडमिशन नाम से फर्जी कंपनी चला रहे थे और नीट पास करने वाले छात्रों से संपर्क कर उन्हें मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का झांसा देकर मोटी रकम ऐंठते थे। पुलिस ने रामघाट रोड अलीगढ़ निवासी दीपेश, गौड़ सिटी निवासी अवनीश श्रीवास्तव, दिव्या मिश्रा, साहिबाबाद निवासी कनिका ओझा उर्फ कविता और जगतपुरी दिल्ली निवासी निधि मारवाह को गिरफ्तार कर किया है। पूछताछ में पता चला कि अवनीश श्रीवास्तव कंपनी में एचआर मैनेजर व दीपेश टेलीकॉलर था। निधि एचआर का काम देखती थी। आरोपियों ने बताया कि कंपनी नीट उत्तीर्ण छात्रों की काउंसलिंग के नाम पर संपर्क करती थी और ग्रेनो के शारदा विश्वविद्यालय व आगरा के सरोजिनी नगर मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठगती थी।
बेटे-बेटी के दाखिले के लिए दिए 32 लाख
गिरफ्तार आरोपियों ने हाल ही में जीनत अली जैदी को ठगा था। जीनत ने बेटे व बेटी के लिए उनसे संपर्क किया था। वहीं, दिल्ली निवासी राजेश शांडिल्य व गुंजन रावत ने भी बेटे के दाखिले के लिए संपर्क किया था। गुंजन से इन लोगों ने शारदा मेडिकल कालेज में काउंसिलिंग कराने के लिए सात लाख रुपये लिए थे। इसके लिए काउंसिलिंग लेटर भी दिया था। जीनत से 32 लाख व राजेश शांडिल्य से 4.5 लाख रुपये इन लोगों ने सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा में दाखिला कराने का झांसा देकर लिए थे। सभी को फर्जी लेटर दिए गए थे।
फर्जी कंपनी का सीईओ उज्ज्वल है मास्टरमाइंड
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि फर्जी कंपनी का सीईओ व मास्टरमाइंड उज्ज्वल है। अर्नव सिंह एडिशनल हेड और शैलेंद्र ब्रांच हेड हैं। रीतेश सेंटर हेड, रितु गुप्ता कोआर्डिनेटर, शाशिकांत एडिशनल कोआर्डिनेटर, कुंदन व हीरालाल सीईओ के सहायक हैं। ये सभी आरोपी फरार हैं। तीन दिन से सभी कंपनी नहीं आ रहे थे। पुलिस इनकी तलाश कर रही है।
नीट के डाटाबेस से छात्र-छात्राओं से करते थे संपर्क
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि आरोपियों के पास मेडिकल परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों का डाटाबेस है। नीट उत्तीर्ण छात्रों से ये लोग अलग-अलग माध्यम से संपर्क करते थे। गिरोह में शामिल युवतियां अभिभावकों व छात्र-छात्राओं से बात कर झांसे में लेते थे। आरोपियों ने तीन महीने पहले ही सेक्टर-62 के आइथम टावर में फर्जी कंपनी खोलकर ठगी शुरू की थी।