नोएडा। फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाले जामताड़ा गिरोह के दो ठगों कोे साइबर क्राइम थाना पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी पहचान पत्रों से मोबाइल सिम खरीदकर गूगल पर नंबर डालकर ठगी कर रहे थे। लोगों को झांसे में लेने के बाद आरोपी एप डाउनलोड कराकर मोबाइल हैक कर लेते थे। इसके बाद खाते से पैसे निकाल लेते थे। आरोपी चार साल में डेढ़ सौ से अधिक लोगों से 35 लाख रुपये ठग चुके हैं। पुलिस इनके साथियों की तलाश कर रही है।
साइबर क्राइम के एसपी डॉ. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, जनवरी में गाजियाबाद निवासी एक शख्स ने शिकायत की थी कि बेटी ने नेट बैंकिंग शुरू कराने के लिए गूगल से कस्टमर केयर का टोल फ्री नंबर प्राप्त किया था। इस नंबर पर जब बात की गई तो आरोपी ने कस्टमर केयर अधिकारी बनकर फोन में क्विक सपोर्ट एप डाउनलोड करवाया और 5.97 लाख रुपये निकाल लिए। मामले की जांच के दौरान सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाना पुलिस ने जामताड़ा गिरोह के दो ठगों को मेरठ से गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मेरठ निवासी मोहम्मद रियाज और बिजनौर निवासी लईक अहमद के रूप में हुई है। इनके पास से पुलिस ने 10 डेबिट कार्ड, तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
मुंबई में हुआ जामताड़ा गिरोह से संपर्क
एसपी साइबर क्राइम ने बताया कि दोनों ठग जामताड़ा गिरोह के सहयोग से लोगों को ठगते थे। लईक चार साल पहले काम के सिलसिले में मुंबई गया था। इस दौरान उसका झारखंड निवासी मामा नामक शख्स से संपर्क हुआ। मामा जामताड़ा गिरोह का सक्रिय ठग है। उसने लईक से दोस्ती कर साइबर ठग का प्रशिक्षण दिया और बैंक खाते के डाटा के साथ ही कॉलिंग और ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले एप के बारे में बताया। इसके बाद लईक साथी रियाज के साथ जामताड़ा गिरोह से मिलकर ठगी करने लगा।
पांचवीं पास ने एमबीए-एमसीए तक को ठगा
साइबर क्राइम थाना प्रभारी रीता यादव ने बताया कि लईक पांचवीं पास है और रियाज कंप्यूटर में पीजीडीसीए कर चुका है। दोनों ने झारखंड के ठग मामा के साथ मिलकर एमबीए, एमसीए व बीटेक पास लोगों तक से ठगी की है। आरोपी इसके अलावा कम ब्याज दर पर लोन दिलाने के नाम पर भी ठगते थे। मामा के संपर्क में आकर दोनों आरोपी इंटरनेट व गूगल सर्च के माध्यम से फर्जीवाड़ा करने लगे। आरोपी फर्जी पहचान पत्र से सिम खरीदकर कस्टमर केयर अधिकारी बनकर बात करते थे। इनके खातों से 35 लाख रुपये से अधिक के लेनदेन की जानकारी मिली है।
खाता दिलवाने के बदले मिलती थी कमीशन
दोनों आरोपियों ने बताया कि जामताड़ा गिरोह को ये गांव के लोगों के नाम पर बैंक खाते भी मुहैया करवाते थे। इनमें जामताड़ा गिरोह के आरोपी साइबर ठगी के पैसे मंगवाते हैं। खाता दिलवाने के एवज में रियाज व लईक को दस से बीस फीसदी कमीशन मिलता था।