गंगाजल का इंतजार कर रही शहर की कालोनियों को अब बोतल बंद गंगाजल मिलेगा। लेकिन इसके लिए लोगों को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा
दिल्ली की तर्ज पर जल निगम प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट से वेस्टेज गंगाजल को रिसाइकिल कर बोतल और जार के जरिए नोएडा और गाजियाबाद के बाजार में बेचेगा।
पीपीपी मॉडल के आधार पर योजना को परवान चढ़ाने के लिए जल निगम ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। अब जल निगम ने निजी कंपनियों को आमंत्रित करने के लिए ईआेआई जारी किया है।
लगातार बढ़ रहे गंगाजल ट्रीटमेंट वाटर प्लांट के रखरखाव पर आने वाले खर्च को पूरा करने के लिए जल निगम ने यह योजना तैयार की है। बीते दिनों हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति की मुहर लगने के बाद जल निगम अब बॉटलिंग प्लांट लगाने वाली कंपनी की तलाश कर रहा है।
योजना के मुताबिक निजी कंपनी को जल निगम प्लांट परिसर में ही बॉटलिंग प्लांट लगाने के लिए जगह देगा। प्रतिदिन प्लांट की सफाई करने में बर्बाद होने वाले 4 क्यूसेक गंगाजल को रिसाइकिल कर कंपनी को उपलब्ध कराया जाएगा।
इस पानी से एक से 20 लीटर की बोतलें तैयार कर बाजार में बेची जाएंगी। बोतल बंद गंगाजल से होने वाली इनकम में जल निगम की निर्धारित शेयरिंग होगी। इससे प्लांट का रखरखाव किया जाएगा।
जल निगम की प्लानिंग है कि बाजारों में बिकने वाली ब्रांडेड पानी की बोतलों से करीब 50 फीसदी सस्ती दरों पर लोगों को गंगाजल उपलब्ध कराया जाएगा।