बच्चों के सुपरस्पेशलिटी इलाज के लिए सेक्टर-30 में करीब 1200 करोड़ रुपये खर्च कर चाइल्ड पीजीआई की बिल्डिंग बनी। करीब 650 करोड़ रुपये इसमें से केवल निर्माण लागत पर खर्च हुए। 2015 में बनकर तैयार हुई बिल्डिंग खराब रखरखाव के चलते केवल नौ साल में ही जर्जर हो रही है। इस बिल्डिंग का रखरखाव कौन करेगा? अब यह भी एक बड़ा सवाल हो गया है। बिल्डिंग के रखरखाव के लिए हर साल करीब 40 करोड़ रुपये का बजट यहां चाहिए।
चाइल्ड पीजीआई प्रशासन के मुताबिक इस बिल्डिंग का निर्माण 2008 में शुरू हुआ। नोएडा प्राधिकरण ने इस बिल्डिंग का निर्माण कराया। वहीं निर्माण करने के लिए राजकीय निर्माण निगम को चुना गया। 2015 में यह बिल्डिंग बनकर तैयार हुई। 2015 में इसका उद्घाटन होने के बाद यहां मरीजों का इलाज होना शुरू हो गया। बिल्डिंग चिकित्सा शिक्षा विभाग को हैंडओवर होने के बाद से ही इसके रखरखाव के लिए पत्राचार भी शुरू हो गया था।
2021 से बिल्डिंग में खामियां सामने आने लगीं। करीब तीन साल से बेसमेंट के दूसरे तल में लगातार पानी का सीपेज बना हुआ है। कुछ जगहों पर तो झरना यहां पिलर्स और बीम के सहारे बह रहा है। इससे दीवारों के अलावा पिलर्स और बीम भी जर्जर हो रहे हैं। ऐसे में बिल्डिंग का बोझ उठा रही पूरी बुनियाद ही कमजोर हो रही है। कुछ जगहों पर तो बेरीकेड कर रास्ता भी रोक दिया गया है जिससे कोई अनहोनी यहां नहीं हो। वहां अब गाड़ियां भी खड़ी नहीं कराई जाती हैं।
केवल बेसमेंट ही नहीं चाइल्ड पीजीआई की छत का भी बुरा हाल है। यहां लंबे समय से बारिश के समय सीपेज होने लगता है। इससे माइक्रोबायलॉजी, पैथोलॉजी विभाग तक में दीवारें सीलन होने से कमजोर हो गई हैं। पिछले दिनों छत की संस्थान ने वाटरप्रूफिंग कराई। इसके बाद ही यहां सीपेज काफी हद तक रूका। रखरखाव में लापरवाही का आलम यह है कि संस्थान के मांगने के बाद भी नोएडा प्राधिकरण और राजकीय निर्माण निगम से जरूरी नक्शे तक आधिकारिक रूप से नहीं मिल सके हैं। हॉस्पिटल के अलावा आवासीय सेक्टर में भी यही हाल यहां बना हुआ है।
फाल्स सीलिंग बनी बड़ा खतरा
चाइल्ड पीजीआई में एक तरफ सिविल निर्माण जर्जर हो रहा है। वहीं यहां लगाई गईं फाल्स सीलिंग भी मरीजों, तीमारदारों के अलावा संस्थान के स्टाफ के लिए खतरा बन चुकी है। पिछले दिनों निदेशक कार्यालय में ही फाल्स सीलिंग गिर गई। इसके अलावा मरीजों के तीमारदारों के लिए बने कमरे में भी पानी के लीकेज से फाल्स सीलिंग खराब हो चुकी है। ऐसे में करीब 30 फीसदी हिस्से में फाल्स सीलिंग गिर चुकी हैं। यहां रूके तीमारदारों को टपकते हुए पानी के बीच ही खुद के मरीजों के इलाज का इंतजार करना होता है।
पूर्व मुख्य सचिव के सामने उठा मुद्दा
चाइल्ड पीजीआई के रखरखाव का मुद्दा पूर्व मुख्य सचिव डीएस मिश्रा के सामने उठ चुका है। इससे पहले पूर्व प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने भी जर्जर हो रही बिल्डिंग को देखा था। निदेशक प्रो. अरूण कुमार सिंह का कहना है कि हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि बिल्डिंग का रखरखाव ठीक हो जाए। कुछ दिक्कतों को दूर भी कराया गया है। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण, राजकीय निर्माण निगम से भी संपर्क किया गया है। शासन से भी बजट की मांग रखरखाव के लिए की गई है। पांचवे तल पर मौजूद माइक्रोबायलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री विभागों को जिला अस्पताल की परिसर के अंदर मौजूद पुरानी बिल्डिंग में शिफ्ट करा रहे हैं। इसका काम शुरू हो गया है।