कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में खुद उनके नेता उतरने को तैयार नहीं हो रहे हैं। जबकि विधानसभा में कांग्रेस नेता हर सीट पर टिकट की मारामारी कर रहे थे।
हालात ये हैं कि प्राइमरी प्रक्रिया में नई दिल्ली सीट पर अजय माकन अकेले दावेदार थे तो बाकी पांच सीटों के लिए जो आवेदन मंगाए गए हैं, उसमें सिर्फ 18 आवेदन मिले हैं। उत्तर-पश्चिम दिल्ली सीट पर टिकट के लिए मजबूत दावेदारी में एक विधायक व दो पूर्व विधायकों ने आवेदन किया है।
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पूर्वी दिल्ली संसदीय सीट से सांसद संदीप दीक्षित के अलावा कोई दूसरा दावेदार नहीं है। हालांकि प्राइमरी प्रक्रिया में उत्तर पूर्वी दिल्ली के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 4 मार्च है जहां से संख्या विरोध के कारण दो से अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। अभी मतदाता सूची तैयार हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, दक्षिण दिल्ली से सांसद रमेश कुमार के अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. योगानंद शास्त्री, प्रदेश उपाध्यक्ष चतर सिंह, पूर्व विधायक बलराम तंवर ने दावेदारी पेश की है तो पश्चिम दिल्ली से महाबल मिश्रा के साथ पार्टी उपाध्यक्ष एसके पुरी ने आवेदन किया है।
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चांदनी चौक से पार्टी उपाध्यक्ष सुखबीर शर्मा ने कपिल सिब्बल की उम्मीदवारी को आवेदन करके चुनौती दी है। उत्तर पश्चिम दिल्ली संसदीय सीट पर पार्टी में विद्रोह दिख रहा है। यहां से सांसद कृष्णा तीरथ के अलावा विधायक जयकिशन, पूर्व विधायक राजेश लिलोठिया व राजकुमार चौहान ने आवेदन किया है।
आवेदन की संख्या कम रहने के पीछे कांग्रेस के नेता तमाम कारण गिनवा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार को माना जा रहा है।
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वहीं, प्रत्येक आवेदन के साथ 10 हजार रुपये का चंदा रखने को भी कारण बताया जा रहा है। तर्क है कि जब प्राइमरी प्रक्रिया में नई दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली में 10 हजार रुपये नहीं लिए जा रहे हैं तो फिर बाकी पांच सीटों पर क्यों?
विधानसभा चुनाव में 15 साल से सत्ता की अगुवाई करने वाले कांग्रेस के नेता हर सीट पर टिकट पाने के लिए मारामारी कर रहे थे। हालात ये थे कि त्रिलोकपुरी, नजफगढ़, मोती नगर, करोल बाग, करावल नगर, बाबरपुर जैसी सीटों पर आवेदकों की संख्या तीन दर्जन तक पहुंच गई थी। लेकिन विधानसभा में हार के कारण नेताओं ने पैर पीछे खींच लिए हैं।