दिल्ली के गाजीपुर के बाद एनसीआर का दूसरा स्लॉटर हाउस यहां झाड़सेतली के पास आबादी के बाहर सेक्टर-57 में बनेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने मंजूरी भी दे दी है।
डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी बनकर तैयार हो गया है। यह करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से ढाई एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। नगर निगम ने इसके लिए जमीन चिह्नित कर ली है।
इसके अलावा जगह-जगह अवैध रूप से खुली मीट की दुकानों पर रोक लगेगी। शहर भी साफ सुथरा होगा। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार इसे बनाया जा रहा है।
खास बात यह है कि इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से फंड की मंजूरी भी मिल चुकी है। दूसरे चरण में गुड़गांव शहर को चुना गया है।
ज्ञात हो कि शहर के विभिन्न हिस्सों में मांस विक्रेताओं ने अवैध रूप से मांस की दुकानें खोल रखी हैं।
यहां न तो शुद्ध मांस मिलता है और न शहर साफ-सुथरा रह पाता है। शहरवासियों को शुद्ध मांस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2009 में नगर निगम ने सरकार के पास स्लॉटर हाउस बनाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई।
लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार नगर निगम ने यहां स्लॉटर हाउस बनाने का निर्णय लिया। भेजे गए प्रस्ताव को राज्य सरकार ने मंजूरी भी दे दी है।
प्रोजेक्ट के अगले चरण में शामिल होगा गुड़गांव
गुड़गांव
- फोटो : अमर उजाला
स्लॉटर हाउस में लगने वाली सभी आधुनिक मशीनें मेड इन इंडिया होंगी। इसे पूरी तरह से वातानुकूलित बनाया जाएगा। अकेले निर्माण में 19 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
दूसरे चरण में गुड़गांव होगा शामिल
स्लॉटर हाउस का डीपीआर सेंट्रल फॉर इंटीग्रेटेड एनीमल हसबैंड्री एंड डेयरी डेवलेपमेंट के सीईओ डॉ. एचपीएस आर्य ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में सरकार ने गुड़गांव में स्लॉटर हाउस खोलने का निर्णय लिया है।
यहां का प्रोजेक्ट करीब 55 करोड़ का है। लेकिन, गुड़गांव नगर निगम अभी जमीन चिह्नित नहीं कर पाया है। उन्होंने बताया कि फरीदाबाद में प्रतिदिन 1000 भेंड़-बकरी और 2000 मुर्गों के मांस उपलब्ध होंगे जबकि, गुड़गांव में 1000 भेड़-बकरी और 24000 मुर्गों के ताजा मांस मिलेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों जिलों में नगर निगम ने भेंड़-बकरी और मुर्गों के मांस के लिए ही सरकार के पास प्रस्ताव भेजा था।
डेढ़ साल में तैयार होगा स्लॉटर हाउस
डॉ. आर्य ने बताया कि स्लॉटर हाउस के लिए फंड केंद्र सरकार देती है। केंद्र सरकार की ओर से फंड आ चुका है। डीपीआर बनाकर राज्य सरकार के पास भेजी जा चुकी है।
अब टेंडर निकाला जाना है। टेंडर निकलने के बाद करीब डेढ़ साल में बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बनने के बाद विभिन्न हिस्सों में मांस विक्रेताओं द्वारा फैलाई जा रही गंदगी से भी निजात मिल जाएगी। क्योंकि सब कुछ वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा।