उत्तरकाशी में सुरंग में फंसे 41 मजदूरों का रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी को सुरक्षित बाहर निकालने वाले मशीन ऑपरेटर नौशाद अली का गांव में आने पर परिजनों, रिश्तेदारों, समाजिक संस्थाओं और ग्राम वासियों ने फूल-मालाएं पहनाकर उत्साह मनाया। उन्हें प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। नौशाद अली मुंबई की ट्रेंचलेस इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम करते हैं।
गाजियाबाद के मसूरी निवासी नौशाद अली (42) एक मध्यमवर्गीय परिवार से हैं और उनके पिता ड्राइवर हैं। नौशाद अली ने हाई स्कूल तक शिक्षा हासिल की है। नौशाद अली ने बताया कि वे मुंबई की ट्रेंचलेस इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में अमेरिकन ऑगर और एचके हेरीकनेक्ट दोनों मशीनें ऑपरेट करते हैं। उनको होरिजेंटल डायरेक्शन में मशीन चलाने की महारत है। टनल में फंसे मजदूरों को निकालने की जिम्मेदारी उनकी कंपनी को मिली थी। कंपनी द्वारा मशीनें उत्तरकाशी टनल साइट पर पहुंच गईं थी और दूसरे साथी ऑपरेटर काम कर रहे थे।
मुंबई से टीम के साथ उत्तराकाशी आए नौशाद
मगर, उनकी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विपिन गुप्ता ने नौशाद अली को मुंबई साइट पर फोन करके उत्तरकाशी टनल में फंसे 41 मजदूरों को निकालने के लिये जब उन्हें बुलाया तो उन्हें बहुत खुशी हुई कि ये काम उनके हाथों से होगा। नौशाद अली ने बताया कि सुरंग में जिस ऑगर मशीन को ये ऑपरेट कर रहे थे, उसका वजन छह सौ टन है। जब उन्होंने टनल में ड्रिलिंग करनी शुरू की तो बीच-बीच में लोहे के जाल आने से रुकावट पैदा हुई। मगर, दिल में जोश और जूनून था और उन फंसे मजदूरों के चेहरे आंखों में थे, बस किसी तरह भी उन तक पहुंचना था।
नौशाद को 18 नवंबर को बुलाया गया
नौशाद ने बताया कि उनकी कंपनी के साथी 13 नवंबर को टनल पर पहुंच गये थे, लेकिन कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विपिन गुप्ता ने उनको 18 नवंबर को वहां बुलाया। सभी रूकावटों को दूर करके 10 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद 28 नवंबर की शाम को आखिर सुरंग में फंसे मजदूरों तक वे पहुंचने में सफल हो गये। जब मजदूरों को सही सलामत निकाला गया तो 41 मजदूरों की जान बचाकर जो खुशी उन्हें मिली उसको बताने के लिये उनके पास शब्द नहीं हैं।
मजदूरों को भगवान पर था विश्वास
नौशाद ने बताया कि बाहर आये मजदूरों ने जयकारा बोला और नौशाद व टीम तथा एनडीआरएफ टीम व उन सभी का बहुत-बहुत धन्यावाद किया, जिन्होंने इस कार्य में अपना योगदान दिया। मैं और मेरी टीम व कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर्स सभी अपने आपको उन मजदूरों को अपने सामने पाकर गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। सभी की आंखें खुशी के आंसुओं से भीगी हुई थी। सभी मजदूर कह रहे थे कि उन्हें भगवान पर पूरा विश्वास था कि कोई न कोई चमत्कार जरूर होगा।
पाइप से खाने के साथ दी गई ऑक्सीजन
नौशाद ने बताया कि उन्होंने एक छह इंच मोटा पाइप सबसे पहले खाने के लिए डाला, जिससे उन्हें खाने के साथ ऑक्सीजन भी मिली। नौशाद ने भावुक होते हुए बताया कि उन्होंने व टीम ने 16 से 20 घंटो तक बिना थके और बिना रूके जुनुन के साथ काम किया। उन्होंने बताया कि टनल में होरीजेंटल डायरेक्शन में खुदाई करके छह-छह मीटर लंबे लोहे के 10 पाइप (साढ़े तीन फिट मोटे) मजदूरों तक पहुंचने के लिए डाले गये। जिस दिन मजदूर बाहर आये उस दिन सारी थकान व भूख प्यास सब खत्म हो गई और अपने को बहुत हल्का महसूस कर रहे थे।
इससे बड़े फक्र की बात और कोई नहीं
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने टीम को बधाई दी। टीम ने रात-दिन जो मेहनत की, ईश्वर ने उनको कामयाबी देकर सुरंग में फंसे 41 व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकालकर जीवन का सबसे बड़ा काम किया है। नौशाद ने कहा कि जब वह अपने गांव पहुंचे तो परिजनों, मोहल्ले वालों और ग्राम वासियों और सामाजिक संस्थाओं ने फूल-मालाएं पहनाईं। साथ ही प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया, जिससे उनका और उनके परिवार का सर गर्व से उंचा हो गया। देश-दुनिया की निगाहें सुरंग में फंसे 41 मजदूरों के लिये लगी थी, जिन्हें उनकी टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। उनके लिये इससे बड़े फक्र की और कोई बात नहीं हो सकती।