फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बहुकोणीय संघर्ष में फंसे गुड़गांव के प्रत्याशी

Sun, 06 Apr 2014 03:55 PM IST
मलिक असगर हाशमी/अमर उजाला, गुड़गांव
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां बहुकोणीय मुकाबले की तस्वीर बन रही है। प्रारंभिक चरण में पिछले बार के दो पुराने प्रतिद्वंदियों के बीच मुकाबले का अनुमान था। लेकिन प्रचार के अंतिम चरण में विभिन्न पार्टियों के शीर्ष नेताआें की रैलियों, रोड शो तथा धुंआंधार नुक्कड़ सभाओं ने तस्वीर बदल दी है।
विज्ञापन


गुड़गांव में मुद्दों से कहीं जातीय समीकरण हावी है। इस लिए प्रत्याशियों ने अपना प्रचार अभियान पूरी तरह मेव तथा यादव बहुल क्षेत्रों में केंद्रित कर लिया है। इस चुनाव में एक और दिलचस्प बात देखने को मिली रही है। प्रचार से गुड़गांव के वास्तविक मसले गायब हैं। यहां तक कि उम्मीदवार भी गुड़गांव शहर में प्रचार करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इस बार लगभग हर प्रत्याशी अपने बड़े नेता को प्रधानमंत्री बनाने की खातिर वोट मांग रहा है।

पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले राव इंद्रजीत सिंह इस बार बीजेपी के उम्मीदवार हैं। जबकि इनसे शिकस्त खाने वाले जाकिर हुसैन ने बसपा को छोड़कर इंडियन नेशनल लोकदल का दामन थाम रखा है। कांग्रेस ने अपने सीनियर लीडर राव धर्मपाल को मैदान में उतारा है।
विज्ञापन


आम आदमी पार्टी की तरफ से उसके रणनीतिकारों में शुमार योगेंद्र यादव तथा बसपा के धर्मपाल पहलवान राठी किस्मत आजमा रहे हैं। इस बार मेव उम्मीदवार सिर्फ जाकिर हुसैन हैं ,जबकि यादव जाति से राव इंद्रजीत, राव धर्मपाल तथा योगेंद्र यादव हैं। इनकी कोशिश है कि दूसरे के गढ़ में उन्हें भले वोट न मिले पर प्रतिद्वंदी का खेल अवश्य खराब हो जाए।

इस बार के चुनाव में पंजाबी, गुर्जर, ब्राह्रमण, बनिया वोटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस लिए 40 हजार पंजाबी वोटरों को रिझाने की खातिर पंजाबी बहुल भीम नगर में अब तक अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा तथा इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला का रोड शो और सभाएं हो चुकी हैं। गुड़गांव की नौ विधानसभाआें में इस बार जाट  मतदाता भी अपने अहम किरदार है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें