यहां बहुकोणीय मुकाबले की तस्वीर बन रही है। प्रारंभिक चरण में पिछले बार के दो पुराने प्रतिद्वंदियों के बीच मुकाबले का अनुमान था। लेकिन प्रचार के अंतिम चरण में विभिन्न पार्टियों के शीर्ष नेताआें की रैलियों, रोड शो तथा धुंआंधार नुक्कड़ सभाओं ने तस्वीर बदल दी है।
गुड़गांव में मुद्दों से कहीं जातीय समीकरण हावी है। इस लिए प्रत्याशियों ने अपना प्रचार अभियान पूरी तरह मेव तथा यादव बहुल क्षेत्रों में केंद्रित कर लिया है। इस चुनाव में एक और दिलचस्प बात देखने को मिली रही है। प्रचार से गुड़गांव के वास्तविक मसले गायब हैं। यहां तक कि उम्मीदवार भी गुड़गांव शहर में प्रचार करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। इस बार लगभग हर प्रत्याशी अपने बड़े नेता को प्रधानमंत्री बनाने की खातिर वोट मांग रहा है।
पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले राव इंद्रजीत सिंह इस बार बीजेपी के उम्मीदवार हैं। जबकि इनसे शिकस्त खाने वाले जाकिर हुसैन ने बसपा को छोड़कर इंडियन नेशनल लोकदल का दामन थाम रखा है। कांग्रेस ने अपने सीनियर लीडर राव धर्मपाल को मैदान में उतारा है।
आम आदमी पार्टी की तरफ से उसके रणनीतिकारों में शुमार योगेंद्र यादव तथा बसपा के धर्मपाल पहलवान राठी किस्मत आजमा रहे हैं। इस बार मेव उम्मीदवार सिर्फ जाकिर हुसैन हैं ,जबकि यादव जाति से राव इंद्रजीत, राव धर्मपाल तथा योगेंद्र यादव हैं। इनकी कोशिश है कि दूसरे के गढ़ में उन्हें भले वोट न मिले पर प्रतिद्वंदी का खेल अवश्य खराब हो जाए।
इस बार के चुनाव में पंजाबी, गुर्जर, ब्राह्रमण, बनिया वोटर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस लिए 40 हजार पंजाबी वोटरों को रिझाने की खातिर पंजाबी बहुल भीम नगर में अब तक अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा तथा इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला का रोड शो और सभाएं हो चुकी हैं। गुड़गांव की नौ विधानसभाआें में इस बार जाट मतदाता भी अपने अहम किरदार है।