सहारनपुर के तीतरो में अंधविश्वास के फेर में आकर एक साल की मासूम के गले में जिंदा मछली फंस गई।
उसकी सांसे रुकने लगी, मुंह से खून आने लगा, परिजन उसे लेकर गंगोह चिकित्सालय भागे, लेकिन रास्ते में तड़पकर उसकी मौत हो गई।
इस घटना से परिवार में कोहराम मचा है और बच्ची की मां अब भी उस पल को कोस रही है जिस पल उसकी बच्ची की जान ले लेने वाला फैसला लिया गया था।
एक्वेरियम से निकाली थी मछली
तितरो के मोहल्ला शेखजादगान निवासी आसिफ की कस्बे में ही सर्राफ की दुकान है। करीब एक साल पहले उसे बच्ची हुई थी। परिजनों ने उसका नाम शैफी रखा था।
कुछ दिन से परिजन बच्ची के दांत नहीं निकलने को लेकर परेशान थे। पिछले दिनों किसी महिला ने आसिफ की पत्नी को बताया कि जिंदा मछली अगर मसूड़ों पर रगड़ दिया जाए तो दांत जल्दी निकल आते हैं।
रविवार को दोपहर में आसिफ की पत्नी ने घर में ही रखे एक्वेरियम से एक छोटी सी मछली निकाल ली और उसे कटोरी के पानी में रख लिया। इसके बाद वह मछली की पूंछ पकड़कर उसके मसूड़ों पर रगड़ने लगी।
अचानक हाथ से छूटी और गले में फंसी मछली
इस दौरान बच्ची की अठखेलियों के चलते अचानक मां के हाथ से मछली फिसल गई। वह सीधे मासूम के गले में जाकर फंस गई। शैफी के गले में मछली फंसने से उसकी सांसे अटकने लगी।
उधर, मां ने तत्काल घर में मौजूद लोगों को शोर मचाकर बुलाया। परिजन उसे लेकर पास में ही स्थित एक निजी चिकित्सक को दिखाया, लेकिन इस दौरान उसकी हालत बिगड़ने लगी।
परिजन उसे लेकर गंगोह में चिकित्सालय के लिए भागे। इस दौरान बच्ची के नाक से खून आने लगा। वह बुरी तरह तड़पने लगी। गंगोह चिकित्सालय पहुंचने पर उसकी सांसे धीमी हो गई थी।
जांच के बाद डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। उधर, पूरे इलाके में इस घटना से हड़कंप मचा हुआ है।