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बिना बंदूक उठाए बना दिल्ली का सबसे खौफनाक अपराधी

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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर भारत के दस मोस्ट वांटेड अपराधियों में से एक गैंगस्टर नीरज बवाना उर्फ नीरज सेहरावत उर्फ नीरज बवानिया (27) को गिरफ्तार किया है।
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नीरज ने पिछले दिसंबर में उत्तराखंड पुलिस की कस्टडी से बागपत में अमित मलिक उर्फ भूरा को छुड़ाया था। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली आदि के करीब 40 मामले दर्ज हैं।

नीरज पर मकोका लगाया जाएगा। बवाना को उसके मामा और पूर्व विधायक रामवीर शौकीन का संरक्षण प्राप्त था। दिल्ली पुलिस ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम रखा था। बवाना पर यूपी और उत्तराखंड की पुलिस ने भी इनाम रखा हुआ था।
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इस तरह हुई नीरज की गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (स्पेशल सेल) एसएन श्रीवास्तव ने बताया कि  एसीपी मनीषी चंद्रा और इंस्पेक्टर उमेश भर्थवाल की टीम को सोमवार रात सूचना मिली थी कि नीरज परिजनों से मिलने कमरुद्दीन नगर, बवाना आएगा। उसके बाद टीम ने मुंडका-बवाना रोड पर घेराबंदी की।

पुलिस टीम को देखते ही हुंडई वर्ना कार में आए आरोपी ने भागने की कोशिश की और पुलिस टीम पर फायरिंग की। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की।

कुछ देर की मुठभेड़ के बाद पुलिस की टीम ने नीरज और उसके साथी मो. राशिद खान उर्फ गुड्डू को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से दो स्वचालित पिस्टल बरामद की गई हैं। नीरज के खिलाफ हत्या का प्रयास और सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है।

दिल्ली में चलाता था उगाही का रैकेट

पुलिस के मुताबिक, नीरज बवाना 26 अक्तूबर, 2013 को जेल से उस समय पेरोल पर बाहर आया था, जब पुलिस ने उसके  साथी नीतू दबोदा को मुठभेड़ में मार गिराया था। उसके बाद वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जबरन उगाही का रैकेट चला रहा था।

वह उद्योगपति, कारोबारियों और सट्टेबाजों से उगाही करता था। विशेष पुलिस आयुक्त ने बताया कि नीरज, उसके भाई पंकज और अन्य साथियों ने उत्तराखंड पुलिस की हिरासत से अमित मलिक उर्फ भूरा को उस समय छुड़वा लिया था, जब उसे बागपत कोर्ट ले जाया जा रहा था। इन्होंने उत्तराखंड पुलिस कर्मियों से दो एके-47 और एसएलआर भी लूट ली थी।

रुड़की के पंडित की हत्या के लिए भूरा को छुड़वाया था

नीरज बवानिया ने रुड़की के शॉप शूटर और गैंगस्टर चीनू पंडित की हत्या के लिए अमित मालिक उर्फ भूरा को उत्तराखंड पुलिस की कस्टडी से छुड़वाया था। एक समय सुनील राठी का शूटर रहा चीनू पंडित और सुनील राठी में हरिद्वार और रुड़की से जबरन उगाही की रकम व प्रॉपर्टी विवाद को लेकर आपस में ठन गई थी।

इस पर सुनील राठी हर हालत में चीनू पंडित का खात्मा चाहता था। यह खुलासा नीरज बवाना ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के सामने किया है। दिल्ली पुलिस अमित भूरा और पौड़ी जेल में बंद सुनील राठी को प्रोडक्शन वारंट पर पूछताछ के लिए दिल्ली लाएगी।

सुनील राठी के लिए प्रोडक्शन वारंट लगाया जा चुका है। अमित भूरा अभी पटियाला, पंजाब पुलिस की कस्टडी में है। पुलिस यह भी देख रही है कि  भूरा को भगाने का और क्या-क्या मकसद थे।

हरिद्वार और रुड़की से आने वाली जबरन उगाही पर दोनों की ठन गई थी

स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बागपत का गैंगस्टर सुनील राठी, नीरज बवानिया, नवीन बाली और बबूल घोघा तिहाड़ जेल में बंद थे। जेल में इनकी दोस्ती हो गई। इसी समय सुनील राठी और चीनू पंडित की ठन गई।

रुड़की का गैंगस्टर चीनू पंडित और सुनील की रुड़की और हरिद्वार आदि जगहों से जबरन उगाही के पैसे को लेकर ठन गई थी। इसके अलावा चीनू पंडित को लगता था कि उसके राज्य की रकम सुनील राठी को क्यों मिले।

इस पर उसने सुनील राठी से अलग होकर अपना अलग गिरोह बना लिया। ऐसे में सुनील ने अपने गिरोह की कमान अमित भूरा को सौंप दी थी।

एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं चीनू पंडित और सुनील राठी

चीनू पंडित और सुनील राठी के बीच रंजिश इस कदर बढ़ गई है कि दोनों एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। यह कहना है दिल्ली पुलिस अधिकारियों का। दरअसल, सुनील राठी के कहने पर अमित भूरा ने अपने साथी विश्वास उर्फ विसू और सचिन खोखर के साथ रुड़की जेल में चीनू पंडित पर उस समय जानलेवा हमला करवाया, था जब वह जमानत पर जेल से बाहर निकल रहा था।

इस हमले में चीनू पंडित तो बच गया था, मगर उसे तीन साथी मारे गए थे। मामले में भूरा गिरफ्तार हो गया था। चीनू पंडित पर सुनील राठी फिर हमला करवाना चाहता था। राठी ने अमित को छुड़वाने की जिम्मेदारी नीरज बवाना को सौंपी।

नीरज ने साथियों के साथ मिलकर 15 दिसंबर, 2014 को अमित भूरा को उत्तराखंड पुलिस की कस्टडी से पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्ची का पाउडर डालकर छुड़वा लिया। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नीरज और अमित भूरा के गिरफ्तार होने से यूपी और उत्तराखंड में कुछ समय के लिए गैंगवार तो रुक गई है, मगर खत्म नहीं हुई है।
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व्यवसायी से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी

फरवरी, 2012 में नीरज बवाना के कहने पर नवीन बाली ने बवाना के व्यवसायी सुनील गोयल से 50 लाख रुपये की फोन पर रंगदारी मांगी थी। इस बाबत व्यवसायी ने बवाना थाने में मामला दर्ज कराया था।

पुलिस बवाना गिरोह के राहुल लाडपुरिया और मंजीत को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बावजूद व्यवसायी से 15 लाख रुपये वसूल लिए गए। इस मामले में नीरज, नवीन व अजय गिरफ्तार हुए थे।

नीरज बवाना ने मई, 2012 में सोनम हॉस्पीटल के मालिक डॉ दिनेश मोदी को कॉल की थी कि या तो वह अस्पताल में आधी हिस्सेदारी दे या फिर 25 लाख रुपये प्रोटेक्शन मनी दे। बवाना थाने में मामला दर्ज हुआ था और नीरज, राहुल और दीपक गिरफ्तार हुए थे।

नीरज बवाना के कहने पर उसके सदस्य सुरेश उर्फकाला ने बाराना, सदर पानीपत के पूर्व प्रधान शिव कुमार को ग्राम पंचायत की 80 एकड़ जमीन पर कब्जा करने केलिए धमकाया था। पूर्व ग्राम प्रधान की कार को टक्कर मारी थी और कनपटी पर पिस्टल लगा दी थी।

इस मामले में राकेश, सचिन, इंद्ररपाल, कुलदीप, तेजवीर, संजय, प्रवीण, अंकुर, प्रवीण काला और नीरज बवाना गिरफ़तार हुए थे। इस मामले में बाद में शिव कुमार केघर पर फायरिंग की थी। इसमें सादा सिंह की मौत हो गई थी जबकि प्रधान की पत्नी घायल हो गई थी।
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