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PPCB ने NGT को बताया: पराली जलाने वालों पर लगाया 13.25 लाख रुपये का जुर्माना, एक हजार 254 FIR दर्ज कीं

Fri, 25 Oct 2024 04:33 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण के संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसमें जमीनी स्तर पर की गई प्रभावी कार्रवाई के संबंध में पीपीसीबी से नियमित अपडेट मांगा था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) ने बृहस्पतिवार को पराली जलाने से रोकने के लिए उठाए गए कदम के बारे में बताया। पीपीसीबी ने दावा किया कि 15 सितंबर से 23 अक्तूबर तक राज्य में पराली जलाने में शामिल लोगों पर एक हजार 254 एफआईआर दर्ज कीं और 13.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह भी कहा कि राज्य सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। इसके अलावा, पराली जलाने की रोकथाम के लिए अपने प्रवर्तन तंत्र में सुधार के लिए कदम उठा रही है।

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इससे पहले, अधिकरण ने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण के संबंध में मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसमें जमीनी स्तर पर की गई प्रभावी कार्रवाई के संबंध में पीपीसीबी से नियमित अपडेट मांगा था। पीपीसीबी के सदस्य सचिव गुरिंदर सिंह मजीठिया ने रिपोर्ट में कहा कि पंजाब राज्य कानून का पालन करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। साथ ही, पराली जलाने की घटनाओं को रोकने व उन पर नजर रखने के लिए शीर्ष कोर्ट और एनजीटी के साथ एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम 2021 (सीएक्यूएम) के जारी निर्देशों को लागू कर रहा है।

पराली जलाने पर एक हजार 254 एफआईआर 
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 15 सितंबर से 23 अक्तूबर के बीच संबंधित अधिकारियों ने पराली जलाने में शामिल लोगों के खिलाफ एक हजार 254 एफआईआर दर्ज कीं। साथ ही, खसरा गिरदावरी (भूमि और फसलों का विवरण वाला कानूनी दस्तावेज) में 496 लाल प्रविष्टियां की गईं। इसके अलावा, 13.25 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। इसमें से 11.67 लाख रुपये वसूल किए गए। 15 सितंबर से 23 अक्टूबर तक की अवधि में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है। इस बार एक हजार 638 घटनाएं सामने आई हैं। जबकि वर्ष 2023 में एक हजार 946 और 2022 में चार हजार 598 घटनाएं घटनाएं घटी थीं।

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