मेवात के गांव मालब में प्रेम प्रसंग के चलते 16 साल के इरशाद की मौत के मामले में 8 महीने बाद भी पुलिस 10 में से एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। ऐसे में बेबस पिता ने अपना दर्द बयां किया है। पीड़ित शेरखां ने कहा,'मेरे पास राजनीतिक पहुंच और पैसा होता तो शायद बेटे के हत्यारे अब तक जेल की सलाखों के पीछे होते। पुलिस से तो विश्वास उठ चुका है, बस अब तो अदालत का ही सहारा रह गया है। वही उसे इंसाफ दिला सकती है।' बता दें कि 9 महीने पहले 4 जुलाई 2016 को प्रेम प्रसंग के चलते गांव के ही कुछ दबंगों ने हत्या कर उसके शव को जंगल में फेंक दिया था।
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पिता ने बयां की उस रात की कहानी
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- फोटो : अमर उजाला
गांव मालब निवासी शेरखां ने बताया कि वह गरीब आदमी है मजदूरी कर अपने बच्चों का पेट भरता है। उसके तीन लड़के और दो लड़कियां हैं जिनमें से सबसे बडा बेटा इरशाद था। गरीबी के चलते वह इरशाद को पढ़ा नहीं सका और ट्रक ड्राईवरी सिखाने के लिये उसे गांव के ही ट्रक चालकों के साथ भेज देता था। बच्चों का सिर छिपाने के लिये एक घर बना रहा था। किसी को मजदूरी ना देनी पड़े इसलिए इरशाद को ट्रक पर जाने से रोक लिया था। घर बनाने के लिये 600 रुपये रोज के लिये एक राज मिस्त्री रख लिया, वह उसकी पत्नी और बेटा इरशाद मिस्त्री को ईंट मसाला पकड़ाने का काम करते।
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चौकीदार की शिकायत पर मामला दर्ज
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शेरखां ने बताया कि 3 जुलाई 2016 की बात है। शाम करीब साढ़े पांच बजे मिस्त्री काम खत्म करते घर चला गया था, बीवी खाना बनाने में जुट गई थी और इरशाद ने कहा अब्बू दस रुपये दे दो मैं चीज लेकर आता हूं। उसके बाद इरशाद आज तक घर वापस नहीं लोटा। पीड़ित ने बताया कि उस रात को इरशाद घर नहीं आया तो उसने समझा कि वह किसी ड्राइवर के घर सो गया होगा इसलिए उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। चार जुलाई को करीब 10 बजे गांव में शोर मचा कि एक लड़के की हत्या कर गांव के जंगल में फें क रखा है, पर उसकी पहचान नहीं हो पा रही है। शेरखां के अनुसार एक तो उसको शक नहीं था कि कोई उसके बेटे की ऐसे हत्या कर सकता है क्योंकि उसकी गांव में किसी से कोई रंजिश भी नहीं थी।
पड़ोसियों पर हत्या का शक
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दूसरे घर के काम पर राज मिस्त्री लगा हुआ था, अगर वह काम को छोड़कर जाता तो फिजूल में राज मिस्त्री को 600 रुपये देने पड़ते। ये सोचकर वह जंगल में शव को देखने नहीं गया। वैसे उसके पड़ोसी देखने गये थे। पड़ोसियों ने बताया था कि किसी बहार के नौजवान लड़के को कोई मारकर उनके गांव के जंगल में डालकर चला गया है। इसलिए भी वह उसे देखने के लिये नहीं गया। नूंह पुलिस ने शव को अज्ञात मानते हुए गांव के चौकीदार की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर शव को पहचान के लिये नूंह अस्पताल में रखवा दिया।
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शव को देखते ही उसके होश उड़ गये।
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जब दो दिन तक इरशाद घर नहीं आया तो शेरखां के दिल में बेचैनी होने लगी। जब मन नहीं माना तो वह नूंह के अस्पताल में अज्ञात शव को देखने चला गया। जहां शव को देखते ही उसके होश उड़ गये। शेरखां ने बताया कि उसका बेटा दबंग आदमी की एक लड़की से प्रेम करता था वह अकसर उसके घर आता जाता था और जिस दिन इरशाद कि हत्या हुई उस दिन से आज तक वह लड़की भी गांव में नहीं है, बताया जा रहा है कि वह अपने मामा के यहां रहती है। शेरखां ने बताया कि जब उनको पूरा यकीन हो गया कि उसके पड़ोसियों ने ही मिलकर उसके बेटे कि हत्या की तो उन्होंने पुलिस को गांव के ही मकसूद, मंजूर, सद्दाम, मजहर, जमालू, साहिब, शाहिद, अरशद, मुबीन और हब्बी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करा दिया।
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आरोपी दबंग हैं उनकी राजनीतिक पहुंच है
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आरोपी दबंग हैं उनकी राजनीतिक पहुंच है। इस वजह से पिछले 9 महीने में पुलिस ने एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। वह पुलिस के पास जाते-जाते थक गया। आखिरकार उसने इंसाफ के लिये अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अब अदालत से उसको पूरा यकीन है कि उसे इंसाफ जरूर मिलेगा। हाईकोर्ट में पीड़ित के वकील एमडी खान ने बताया कि इस मामले की करीब 6 महीने से दूसरा वकील पैरवी कर रहा था। अदालत पिछले काफी से समय मेवात पुलिस से इसका जवाब मांग रही थी लेकिन पुलिस ने अदालत को कोई जवाब नहीं दिया। उसके बाद इस केस को उसने नए सिरे से अदालत में डाला है जहां अदालत ने सख्ती दिखाते हुए पुलिस से पूछा है क्यों ना इस मामले को सीबीआई को भेज दिया जाए। फिलहाल अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 मई रखी है।
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क्यों कोर्ट हुआ सख्त: मेवात क्षेत्र में पिछले साल 16 साल के किशोर की हत्या करने के मामले की जांच सीबीआई से करवाने की अपील पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि किशोर के हाथ-पैर तोड़ उसके सिर के दो टुकड़े कर दिए गए। आरोपियों की ऊंची पहुंच के कारण कार्रवाई न होने की बात कही जा रही है। इस जघन्य मामले की जांच क्यों न सीबीआई को सौंप दी जाए।
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हरियाणा सरकार ने इस पर जवाब के लिए समय देने की अपील की, जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को एक मई तक के लिए टाल दिया। याचिका में आरोप है कि आरोपी पूर्व परिवहन मंत्री के करीबी हैं, इसलिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामले में मृतक के पिता की ओर से एडवोकेट एमडी खान ने याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि चार जुलाई-2016 को नूंह स्थित याची के गांव में एक किशोर का शव खेतों में पड़ा मिला था।
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इस बारे में चौकीदार ने पुलिस को सूचना दी थी और शव को अज्ञात मान लिया गया था। जब याची का बेटा पूरा दिन लापता रहा तो उसने पूछताछ शुरू की। इसके बाद उस शव को देखकर याची ने उसे पहचान लिया। जांच में उसे पता चला कि एक लड़की के साथ उसके बेटे को कुछ लोगों ने देख लिया था। इसके बाद से ही वह लड़की लापता है। याची ने कहा कि शव की स्थिति ऐसी थी जिसे देखकर उसकी आत्मा कांप गई।
हत्या इतनी निर्ममता से की गई थी कि शव को देखा तक नहीं जा रहा था। सिर के दो टुकड़े हो गए थे और गला भी काटा गया था। इसके साथ ही दोनों हाथ-पैर बुरी तरह से तोड़े गए थे। जब याची ने हत्या के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए थाने के चक्कर लगाना शुरू किया तो भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। याची ने आईजी रेवाड़ी रेंज से भी फरियाद की, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। इसका कारण याची को पता चला कि आरोपी पूर्व परिवहन मंत्री के करीबी हैं। इस कारण अब याची के पास न्यायालय के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है, जहां से वे इंसाफ पा सके।