80 फीसदी मरीजों में होता है इस्तेमाल
लगभग 80 फीसदी कैंसर मरीजों पर लीनियर एक्सीलेरेटर की जरूरत पड़ती है। डॉक्टरों की माने तो गले का कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, लंग्स का कैंसर सहित अन्य सभी तक के मरीजों पर इसका इस्तेमाल हो सकता है। यह काफी सुरक्षित माना जाता है और इसका असर भी काफी ज्यादा होता है।
अभी चार माह की वेटिंग, आगे होगी कम
सफदरजंग अस्पताल में रेडियोथेरेपी करवाने आ रहे कैंसर मरीजों को अभी तीन से चार माह का वेटिंग समय दिया जा रहा है। अस्पताल में अभी कोबाल्ट बेस रेडिएशन मशीन है। इसकी मदद से कैंसर मरीजों को रेडियोथेरेपी दी जाती है। अभी जिस तरह से रेडिएशन दी जा रही है, उसमें कोशिश की जाती है कि अन्य कोशिकाओं को कम नुकसान हो, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाता। डॉक्टरों की माने तो लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन लगने के बाद सफदरजंग अस्पताल में रोजाना 70 से 80 मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी जा सकेगी। ऐसा होने के बाद अस्पताल में रेडिएशन लेने आ रहे मरीजों की वेटिंग तेजी से घटेगी। उम्मीद है कि कुछ ही दिनों में यह पूरी तरह से खत्म भी हो सकेगा।
रोज आते हैं 400-500 मरीज
सफदरजंग अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 300-400 मरीज कैंसर का उपचार करवाने आते हैं। यह एम्स के बाद यह केंद्र सरकार का दिल्ली में दूसरा सबसे बड़ा सेंटर है। यहां उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा सहित दूरदराज से हर साल हजारों मरीज उपचार करवाने आते हैं। ऐसे में लंबी वेटिंग मिलने के बाद कई बार दूर क्षेत्र से आए मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है,जबकि कैंसर मरीजों का उपचार काफी महंगा है।