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Anang Tal Baoli: उपराज्यपाल वीके सक्सेना का निर्देश, अनंग ताल बावली को 2 महीने में विकसित करें अधिकारी

Mon, 27 Jun 2022 05:38 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने डीडीए, एएसआई और डीजेबी के अधिकारियों संग अनंग ताल बावली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अनंग ताल बावली को दो माह के भीतर विकसित करने का निर्देश दिया है। 
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने अनंग ताल बावली का किया दौरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने अनंग ताल बावली को दो माह के भीतर विकसित करने का निर्देश दिया है। वर्तमान में बावली सूखी है। इसकी तलहटी में नाममात्र पानी है। आसपास के होटलों और झुग्गियों से निकलने वाले सीवेज की गंदगी इसमें जमा है।

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उपराज्यपाल ने रविवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण, एएसआई, दिल्ली जल बोर्ड और वन विभाग के अधिकारियों के साथ 11वीं शताब्दी के इस विरासत स्थल का दौरा किया। उन्होंने बावली को पुराने स्वरूप में वापस लाने और ताजे पानी से भरने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा है कि इस संरचना की विरासत पहचान, विशेष कर मिट्टी के नीचे दबी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इसका जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए। अनंग ताल बावली घने आरक्षित संजय वन में स्थित है, जो कि दक्षिण मध्य रिज का एक हिस्सा है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में तोमर शासक अनंगपाल द्वितीय द्वारा तैयार करवाया गया था।

बावली से गाद निकालने का काम शुरू
उपराज्यपाल के दौरे के तुरंत बाद ही डीडीए ने अनंग ताल बावली से गाद निकालने का काम शुरू कर दिया है, वहीं एएसआई भी जल्द खुदाई का काम शुरू कर देगा और अगले 3-4 दिनों में उपराज्यपाल को एक निश्चित समय सीमा में काम को पूरा करने की एक रिपोर्ट सौंपेगा। मानसून आने से पहले तालाब की डीसिल्टिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा ताकि तालाब में बारिश का ताजा पानी भरा जा सके। करीब 45 फीट गहरे अनंग ताल बावली के जीर्णोद्धार से न केवल भूजल रिचार्ज होगा, बल्कि क्षेत्र की सुंदरता में भी इजाफा होगा। यह जगह एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगी। 
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जंगल में फलदार पेड़ लगाने के निर्देश
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को जंगल के भीतर फलदार पेड़ लगाने का निर्देश दिया ताकि विलायती कीकर के पेड़ों की कम किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे संजय वन में कोकून पालन शुरू करें ताकि लोगों, विशेषकर स्कूली बच्चों में रेशम उत्पादन के बारे में जागरूकता पैदा की जा सके। सक्सेना ने अधिकारियों को जंगल के अंदर हरे भरे स्थान की पहचान करने के निर्देश दिए, जिन्हें विकसित कर प्राकृतिक परिवेश में छोटे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों, त्योहारों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य मनोरंजक गतिविधियों के आयोजन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

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