इसके अलावा एलजी ने छह ऐसे पदों को रद्द करने की सिफारिश पर सहमति दी है जो साल 2013 से लेकर 2017 तक रिक्त होने की वजह से तत्काल समाप्त श्रेणी में माने गए।
एलजी ने आवश्यक मूल्यांकन और अध्ययन के बाद दिल्ली सरकार के वित्त विभाग और प्रशासनिक सुधार (एआर) विभाग की सिफारिश के बाद इस फैसले को लिया। साल 2019 में प्राचार्य-उपशिक्षा अधिकारी के 2 पद रिक्त थे, दो अन्य पद भी साल 2020 में रिक्त हो गए।
रिकॉर्ड के अनुसार इस तरह के 23 पद वर्ष 2020 में रिक्त थे और दो अन्य पद अप्रैल 2021 तक रिक्त हो गए थे। समाप्त किए गए 6 पदों में से तीन 2013-2014 में रिक्त थे, जबकि दो पद वर्ष 2014-15 में और 2016-17 से एक पद रिक्त है। इससे पहले, अप्रैल 2023 में शिक्षा विभाग ने एआर विभाग के अवलोकन के बाद 126 पदों की बहाली और शिक्षा निदेशालय में रिक्त पड़े कुल 370 पदों में से प्राचार्य-उपशिक्षा अधिकारी के 244 पदों को बनाने को मंजूरी ली थी।
ये पद वर्ष 2013-14 से 2019 तक पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने के लिए खाली हैं। हालांकि, जब ये उपरोक्त प्रस्ताव प्रशासनिक सुधार विभाग और वित्त एवं योजना विभाग में विचाराधीन था, तब कुछ अन्य पद भी समाप्त माने गए श्रेणी में आ गए। जबकि कई अन्य पदों की बहाली-रद्द करने के लिए नए सिरे से विचार किया जा रहा है।
इन पदों को लेकर शिक्षा विभाग ने अपने प्रस्ताव में कहा कि इन पदों की जरूरत है। मौजूदा समय में स्कूल कार्य का प्रबंधन उप-प्रधानाचार्यों कर रहे हैं। यह एक अस्थायी व्यवस्था है। इन पदों को लंबे समय तक जारी नहीं किया जा सकता।