अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भ्रष्टाचार में कमी आई है या आगे की जांच के लिए कम मामलों को ही जांच एजेंसियों के पास भेजा गया है।
अमर उजाला को मिले दस्तावेज से स्पष्ट है कि करीब पौने दो सालों में एम्स के अंदर होने वाले भ्रष्टाचार के दो ही मामलों को आगे की जांच के लिए जांच एजेंसियों को भेजे गए। वहीं, भ्रष्टाचार के पुराने मामलों की ज्यादातर जांच को लंबित ही रखा गया है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से कहा गया है कि एक मामले को आगे की जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और भ्रष्टाचार के एक ही मामले को आगे की कार्रवाई के लिए सलाह लेने के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजा गया है।
एम्स ने आधिकारिक दस्तावेज में कहा है कि 17 अगस्त 2014 के बाद भ्रष्ट्राचार के दो ही मामले को आगे की जांच के लिए जांच एजेंसियों को भेजे गए। एम्स के अंदर की भ्रष्टाचार के पुराने मामलों की ज्यादातर जांच को लंबित रखा गया है।
एम्स के मुख्य सतर्कता अधिकारी रहे संजीव चतुर्वेदी के कार्यकाल में एम्स के अंदर भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर हुए थे और कई में कार्रवाई भी की गई थी। संजीव के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के जिन मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए आगे भेजा गया उनमें कमोवेश ज्यादातर मामलों में जांच वहीं की वहीं रुक गई।
हालांकि वर्तमान केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जे.पी.नड्डा के स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद कहा था कि संजीव के कार्यकाल के दौरान हुईं जांचों को लंबित रखा जाएगा या उनकी दोबारा से जांच कराई जाएगी। संजीव चतुर्वेदी को एम्स के सीवीओ पद से हटाने को लेकर काफी विवाद हुआ था और इन कथित भ्रष्टाचार के मामलों में जेपी नड्डा का नाम भी सामने आया था।