पुलिस ने किसानों के सामने फिर वार्ता का प्रस्ताव रखा। सड़क पर हुई वार्ता में हल नहीं निकलने पर किसान फिर से दिल्ली की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने किसानों को फिर से रोकने की कोशिश की। किसानों ने नहीं मानने पर पुलिस ने सभी को हिरासत में लेने के लिए बसें बुला लीं। पुलिस लाइन ले जाने के लिए किसानों को जबरदस्ती बसों में बैठाया जाने लगा। किसानों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। वह एकजुट होकर दिल्ली की ओर जाने लगे। एक बार फिर पुलिस से उनकी नोकझोंक हुई।
मौके पर मौजूद आलाधिकारियों ने शासन से बात करने का आश्वासन देते हुए किसानों को आगे बढ़ने से रोका। देर शाम को शासन से आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने पीछे हटना शुरू किया। पुलिस कमिश्नर के हाईलेवल कमेटी का गठन कराने और गंभीरता से समस्या के समाधान का आश्वासन देने पर किसान सहमत हुए। देर शाम उनकी पुलिस कमिश्नर के साथ वार्ता चलती रही। इसमें भारतीय किसान परिषद के अध्यक्ष सुखबीर खलीफा समेत अन्य किसान नेता शामिल रहे।
किसानों को समर्थन देने जा रहे सपाइयों को हिरासत में लिया
किसानों के दिल्ली कूच का समर्थन करने पर पुलिस ने समाजवादी पार्टी के 50 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पार्टी जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी सहित कई नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। इस कार्रवाई से सपा नेताओं में रोष है। पार्टी जिलाध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को अधिकार देने के बजाय अपराधियों जैसा बर्ताव कर रही है।
महिलाओं को हुई दिक्कत
मार्च में शामिल होने के लिए घरों से निकली महिलाओं को काफी दिक्कत आई। दलित प्रेरणा स्थल के पास धक्का मुक्की के दौरान एक महिला बेहोश हो गई। सेक्टर-24 से पुलिस हिरासत में लेकर जाने वाली महिलाओं के साथ अच्छा बर्ताव नहीं किया गया। बस में मौजूद महिलाओं ने वीडियो के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर की। एक और वीडियो वायरल हुआ। इसमें एक महिला गाड़ी में बैठी हुई है और उनकी तबियत खराब हो रही है।
हाईलेवल बैठक से होगा बेड़ा पार
पुलिस व किसानों के बीच यह प्रस्ताव पास हुआ कि एक हाईलेवल बैठक कराई जाए। इसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, पुलिस कमिश्नर, तीनों प्राधिकरणों के सीईओ, अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, एनटीपीसी सीएमडी, औद्योगिक विकास मंत्री शामिल होंगे। किसानों ने कहा कि जितनी जल्दी हो सके इस बैठक को कराया जाए। उन्होंने सात दिनों का अल्टीमेटम भी दिया।
150 से अधिक किसान नेता रहे नजरबंद
दिल्ली कूच की घोषणा को देख पुलिस बुधवार रात से ही सक्रिय हो गई। रात में ही 150 से अधिक किसान नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। हालांकि कुछ किसान नेता पुलिस को चकमा देकर किसी तरह नोएडा तक पहुंचे गए। वहीं बृहस्पतिवार सुबह भी कई किसान नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया गया।सुबह से शाम तक किसान नेताओं के मोबाइल पुलिस के कब्जे में रहे। इससे अन्य नेताओं से उनकी बात नहीं हो पाई। किसान सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा और संयोजक वीरसिंह नागर को बुधवार रात को ही पुलिस ने हिरासत में लेकर सेक्टर-146 स्थित फार्म हाउस में रखा गया। बृहस्पतिवार रात आठ बजे के बाद दोनों को रिहा किया गया। उधर, जय जवान जय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील फौजी को भी बुधवार रात में ही हिरासत में ले लिया था। दादरी कोतवाली की हिरासत से बृहस्पतिवार देर शाम रिहा किया गया। किसान नेता मोहित नागर और प्रशांत भाटी को पुलिस ने धूम मानिकपुर स्थित पुलिस चौकी में रखा गया। इसके अलावा गबरी मुखिया को पतवाड़ी में और दुष्यंत नागर को रोजा जलालपुर के घर में हाउस अरेस्ट किया गया।
18 संगठनों के नेतृत्व में पहुंचे किसान
दिल्ली कूच को नोएडा और ग्रेनो समेत अन्य राज्यों के कुल 18 संगठनों ने समर्थन देने की घोषणा की थी। ग्रेनो के जय जवान जय किसान मोर्चा, अखिल भारतीय किसान सभा, संयुक्त किसान मोर्चा (भूमि अधिकार), भारतीय किसान सभा, भारतीय किसान परिषद, भारतीय किसान यूनियन चढूनी, भाकियू कृषक शक्ति, भाकियू स्वतंत्र, भाकियू अजगर, भाकियू अखंड, भाकियू, संयुक्त किसान मोर्चा संगठन, जय हो संगठन, सिस्टम सुधार संगठन आगरा, हरियाणा संघर्ष समिति, दक्षिण भारत के किसान संगठन सिफा और राष्ट्रीय किसान समन्वय समिति ने समर्थन दिया था। वहीं नोएडा से तीन किसान संगठनों ने भारतीय किसान परिषद ,अखिल भारतीय किसान सभा और जय जवान जय किसान ने इसका समर्थन किया। सभी संगठनों के नेतृत्व में बड़ी तादाद में किसान, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं मार्च के लिए पहुंची। अहम है कि बीते दिनों महापंचायत के बाद दिल्ली कूच कर संसद भवन के घेराव का फैसला लिया गया था।
ग्रेनो प्राधिकरण के पास धरनास्थल रहा खाली
ग्रेनो प्राधिकरण पर किसानों का धरना एक जनवरी से जारी है। बृहस्पतिवार को पुलिस ने धरनास्थल पर किसानों को आने नहीं दिया। सुबह से ही किसानों पर नजर रखी जा रही थी। धरनास्थल के पास पहुंचे किसानो को हिरासत में लेकर अलग अलग चौकी व थाने भेज दिया गया। इस कारण ग्रेनो प्राधिकरण पर किसानों का धरना स्थल खाली पड़ा रहा।