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Kidney scandal: दोनों अस्पतालों और सीएमओ को पुलिस की क्लीन चिट, बांग्लादेश दूतावास अभी भी रिपोर्ट का इंतजार

Thu, 18 Jul 2024 09:11 AM IST
शाहरुख खान पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किडनी कांड में दोनों अस्पतालों और सीएमओ को दिल्ली पुलिस ने क्लीन चिट दे दी है। दिल्ली पुलिस को नोटिस का जवाब मिल गया है। वहीं, बांग्लादेश दूतावास से अभी कोई जवाब नहीं मिला है।
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Kidney Racket - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत-बांग्लादेश किडनी कांड में दिल्ली पुलिस ने गौतमबुद्ध नगर के चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) और दोनों अस्पतालों को क्लीन चिट दे दी है। दिल्ली पुलिस ने नोटिस देकर सीएमओ और अस्पताल प्रशासन से किडनी प्रत्यारोपण के बारे में पूछा था। जवाब मिलने के बाद इन्हें क्लीन चिट दी गई है। 
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वहीं, बांग्लादेश दूतावास से दिल्ली पुलिस को बुधवार शाम तक कोई जवाब नहीं मिला था। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि वह एक्सटर्नल कमेटी के सदस्य थे। 

किडनी डोनर व प्राप्तकर्ता की फाइल पर आखिर हस्ताक्षर वही करते हैं। वे ही पूछताछ कर कागजात देखते हैं। डोनर व प्राप्तकर्ता की वीडियो भी बनाई जाती है। दोनों के संबंधों व किडनी प्रत्यारोपण के लिए हामी भी ली जाती है। 
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ये जवाब मिलने के बाद पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी। वहीं, यथार्थ व अपोलो अस्पताल ने जवाब दिया है कि कमेटी जब ओके करती थी, तभी वे किडनी प्रत्यारोपण करते थे। उन्हें दूतावास से भी मंजूरी मिलती थी। अस्पतालों के जवाबों को देखकर पुलिस ने इन्हें भी क्लीन चिट दे दी।
 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीएमओ व अस्पतालों की कोई भूमिका सामने नहीं आई है। डॉ. डी विजया कुमारी, निजी सचिव और दलालों की अहम भूमिका होती थी। ये डोनर व किडनी प्राप्तकर्ता के ऐसे कागजात तैयार करवाते थे कि कोई पकड़ न पाए या कागजात पर सवाल न उठाए। 

 

बांग्लादेश दूतावास का एक कर्मचारी पैसे लेकर सभी फाइलों को ओके कर देता था। ये कर्मचारी एक फाइल के बीस हजार रुपये लेता था। आरोपी 500 लोगों की किडनी बदलवा चुके थे। 
 

पुलिस ने विदेश मंत्रालय के जरिये बांग्लादेश दूतावास से पूछा है कि डोनर व किडनी प्राप्तकर्ता के कागजात सही होते थे या नहीं। फाइलों को किस आधार पर दूतावास की ओर से स्वीकृत कर दिया जाता था। 

 

फाइल को ओके की रिपोर्ट देने वाले कर्मचारी की भूमिका क्या है। वह जानबूझकर फाइलों को स्वीकृत करते थे। हालांकि, दूतावास की ओर से बुधवार शाम तक कोई जवाब नहीं मिला था। 

नौकरी दिलाने के नाम पर भारत लाते थे
पुलिस ने ये स्पष्ट कर दिया है कि गैरकानूनी रूप से किडनी बदलने का कारोबार भारत से ज्यादा बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर फैला हुआ था। गिरोह के सदस्य तीन से चार लोगों की जान भी ले चुके हैं। किडनी बदलने के बाद इन लोगों की मौत हो गई थी। ज्यादातर किडनी प्रत्यारोपण नोएडा के यथार्थ व अपोलो अस्पताल में हुए थे। बांग्लादेश के गरीब लोगों को भारत में नौकरी दिलाने के बहाने लाया जाता था। इसके बाद ये उन लोगों का पासपोर्ट जब्त कर कर पैसे का लालच देकर किडनी देने के लिए मजबूर कर देते थे।

 

जांच में गलत भूमिका सामने नहीं आई : यथार्थ 
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि मरीजों का यथार्थ में ट्रांसप्लांट नियमानुसार ही होता है। डॉ. विजया यहां सीधे तौर पर सेवाएं नहीं दे रही थीं। वह अन्य अस्पतालों में भी सेवाएं दे रही थीं। हम जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। जांच में अभी तक हमारे अस्पताल की किसी भी तरह की कोई गलत भूमिका सामने नहीं आई है।

शक के दायरे में नहीं
मामले में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि, सीएमओ व दोनों अस्पताल शक के दायरे में नहीं आए हैं। सीएमओ डा़ॅ सुनील    कुमार व दोनों अस्पतालों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया था। सभी से जवाब मिल गया है। सभी ने कहा है कि कागजात ठीक हैं। जरूरत पड़ी तो एक्सपर्ट की सलाह ली जाएगी। कागजों की जांच की जा रही है। - अमित गोयल, पुलिस उपायुक्त, अपराध शाखा


 
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अभी इस मामले की जांच चल रही है। इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। -डॉ. सुनील कुमार शर्मा, सीएमओ, गौतमबुद्ध नगर
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