मध्य जिला की साइबर थाना पुलिस ने राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी के राज्य सचिव को साथी के साथ साइबर ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान दिनेश कुमार यादव (39) और प्रवीन कुमार (38) के रूप में हुई है। दिनेश ने वर्ष 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मधुबनी के हरलखी से चुनाव लड़ा था।
आरोपियों ने विदेश भेजने के नाम पर देशभर के 500 लोगों को ठगा है। इनके बैंक खातों में कुछ ही दिनों के भीतर दो करोड़ से अधिक की रकम का लेन-देन हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लाख रुपये, बैंक खाते में ढाई लाख रुपये, छह मोबाइल, छह सिम, लैपटॉप और 16 डेबिट कार्ड व भारी मात्रा में दस्तावेज बरामद किए हैं। ठगी की रकम से करोड़ों की जमीन खरीदने की जानकारी भी मिली है।
पुलिस उपायुक्त श्वेता चौहान ने बताया कि पिछले दिनों मध्य जिला के साइबर थाने में 17.60 लाख रुपये ठगी की शिकायत आई थी। पीड़ित मोहम्मद असकर ने बताया कि उसका दोस्त शीजू पोलैंड में है। उसे भारत से कुछ लोगों को काम के लिए बुलाना था। असकर ने 30 लड़कों का इंतजाम कर शीजू को सूचना दी। असकर ने फेसबुक पर आर्यन ट्रैवल्स का विज्ञापन देखा जो वीएफएस ग्लोबल से जुड़ी थी। वीएफएस विदेश में जाने वाले युवाओं की तलाश कर वीजा दिलवाती है। असकर ने फेसबुक पेज पर दिए गए नंबर से संपर्क किया।
असकर ने कहा कि वह उनकी कंपनी को लड़के उपलब्ध करा देगा। हर युवक के लिए असकर ने 35 हजार रुपये मांगे। असकर ने 76 की डिटेल उपलब्ध करवा दी। इसके बाद उसने दिए गए बैंक खाते में 17.60 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद युवकों के पास वीजा के साथ नियुक्ति पत्र मेल पर आ गए। सभी दिए गए पते पर पहुंचे तो पता चला सभी नियुक्ति पत्र फर्जी हैं। इसके बाद असकर की शिकायत पर साइबर थाने ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। थाना प्रभारी खेमेंद्र पाल सिंह, एसआई धीरेंद्र कंवर व अन्यों की टीम ने टेक्निकल सर्विलांस की मदद से आरोपियों का पता लगाने का प्रयास किया।
छानबीन के दौरान पता चला कि रुपये ट्रांसफर होकर बिहार के अलग-अलग बैंकों में गए हैं। ऐसे मे एक टीम को 11 जनवरी को मधुबनी भेजा गया। टीम ने 13 जनवरी को आरोपी दिनेश और प्रवीन कुमार को गिरफ्तार कर दिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने ठगी की बात स्वीकार की। प्रवीन ने बताया कि वह मलयेशिया जाकर काम कर चुका है। उसे वीजा से जुड़ी दिक्कतों का पता था। वह पूरी प्रक्रिया को भी जानता था। प्रवीन ने दिनेश के साथ मिलकर ठगी की साजिश रची।
ऐसे होती थी ठगी की वारदात
आरोपियों ने फेसबुक पर अलग-अलग नामों से पेज बनाए। यहां यह वीएफएस संस्था से जुड़े होने की बात कर वीजा दिलवाने का भरोसा दिया। जैसे ही लोग जाल में फंसते थे तो आरोपी ऑनलाइन रकम ट्रांसफर करवा लेते थे। हर बार नए मोबाइल नंबर व पते से वारदात को अंजाम दिया जाता था। हर डेढ़ से दो महीनें के भीतर फेसबुक पेज को डिलीट कर दिया जाता था। ठगी की रकम मंगाने के लिए 40 से 50 रुपये देकर अकाउंट का जुगाड़ किया जाता था। इसमें ठगी की रकम मंगाई जाती थी।
करोड़ों की ठगी से खरीदी जमीन
दिनेश ने बताया कि उसे लगता था कि बिहार में राजनीतिक पहुंच होने के कारण उस तक कोई नहीं पहुंच सकेगा, इसलिए वह बड़े आराम से ठगी कर रहा था। उसने ठगी की रकम से मधुबनी और दूसरी जगहों पर करोड़ों की जमीन खरीद ली थी। यहां इसने बिल्डिंग मेटेरियल का धंधा भी शुरू कर दिया था।