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फर्जी कॉल सेंटर: माइक्रोसॉफ्ट का अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को बनाया शिकार, जानिए कैसे हुआ खुलासा?

Sat, 04 Jun 2022 09:30 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। साथ ही आरोपियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि इनलोगों ने कितने की ठगी की है। 
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गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बाहरी जिला साइबर सेल रानीबाग इलाके में चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने चार मुख्य आरोपी समेत यहां काम कर रहे 28 टेली कॉलर को गिरफ्तार किया है। आरोपी व्यक्ति खुद को माइक्रोसॉफ्ट का अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों से धोखाधड़ी कर रहे थे। इनके कब्जे से पुलिस ने 29 स्मार्टफोन, कई सीपीयू से 25 हार्डडिस्क, दो लैपटॉप, एक डीवीआर, तीन राउटर और एक राउटर बरामद किया है।

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जिला पुलिस उपायुक्त समीर शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार चार मुख्य आरोपियों की पहचान सेक्टर-120 नोएडा निवासी मोहित खन्ना, गांव बहाना झज्जर हरियाणा निवासी भूपिंदर सिंह, हरिनगर निवासी राहुल मखीजा और पीतमपुरा निवासी शुभम के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिले में बढ़ते साइबर ठगी को देखते हुए साइबर सेल को जालसाजों पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया। पुलिस टीम ने मुखबिरों को सक्रिय किया। पुलिस को पता चला कि रानी बाग के रोड नंबर 44 पर फर्जी कॉल सेंटर चलाया जा रहा है। 
 

पुलिस ने छानबीन शुरू की, जिसमें पता चला कि जालसाज अमेरिकी नागरिकों के साथ बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी कर रहे हैं। आरोपी नागरिकों को माइक्रोसॉफ्ट के अधिकारी बताकर समस्या को हल करने का झांसा देकर ठगी करते हैं। पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में मामला देने के बाद निरीक्षक संदीप पंवार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इंजीनियर्स एन्क्लेव में छापेमारी की गई। इमारत की पहली मंजिल पर कॉल सेंटर चल रहा था। जहां एक ही परिसर में दो अलग-अलग हॉल में 25 से अधिक महिला और पुरुष कई कंप्यूटरों पर काम कर रहे थे। 

 

जांच में पाया गया कि सभी अमेरिकी नागरिकों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसके लिए कंप्यूटर और सहायक उपकरण का एक सेटअप स्थापित किया गया था। जालसाज वीओआइपी कॉलिंग का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे थे। जांच में पता चला कि आरोपी घोखाधड़ी के लिए कई एप का इस्तेमाल कर रहे थे। इनके पास से अमेरिकी नंबरों की एक सूची भी मिली। 

 
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पूछताछ के बाद पता चला कि शुभम को कंप्यूटर और कॉल सेंटर का अच्छा ज्ञान है। वह कंप्यूटर साइंस में बी.टेक है और बीपीओ कंपनियों में काम कर चुका है। वहीं मोहित खन्ना 2004 से कॉल सेंटरों में काम कर रहा था और उसे इस क्षेत्र का विशेष अनुभव है। इसलिए उन्होंने अन्य आरोपी व्यक्तियों के साथ अपना कॉल सेंटर खोलने की साजिश रची।
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