घरेलू विवाद में बाहरी लोगों की दखलअंदाजी हत्या का कारण बन गया। झगड़ा होने के बाद पत्नी के अपने परिवार वालों को घर बुलाना आरोपी हितेंद्र को कतई पसंद नहीं था। जब रात में झगड़ा हो रहा था तो उस समय हितेंद्र का एक दोस्त भी वहां मौजूद था। बातचीत के दौरान आरोपी के दोस्त ने कुछ कहने की कोशिश की। लेकिन हितेंद्र के सालों ने इसका विरोध किया और घरेलू विवाद में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।
यह बात को सुनते ही हितेंद्र और उसके दो बेटों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और फिर उनके बीच हाथापाई हो गई। पुलिस के सामने हितेंद्र की सास चंद्रकला पूरी घटना के बारे में बताया। उसने बताया कि वह अपने दो बेटों विजय और सुरेंद्र और उनके परिवार के साथ विनोदपुरी, पालम रोड डाबड़ी में रहती हैं। उसकी बेटी सीमा की शादी 30 जून 2001 को शकूरपुर निवासी हितेंद्र यादव से हुई थी। उसने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही हितेंद्र सीमा के साथ मारपीट करता था।
सीमा उनलोगों से आए दिन होने वाले झगड़े की शिकायत करती थी। रविवार को भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। हितेंद्र ने सीमा को बुरी तरह पीटा था। सीमा के फोन करने पर उन्हें समझाने के लिए चंद्रकला अपने बेटों विजय, सुरेंद्र, विजय की पत्नी बबीता और बबीता का भाई चंद्रभान के साथ सीमा के घर पहुंची थी। समझाने के दौरान गरमागरमी होने लगी। इसी दौरान हितेंद्र का दोस्त ललित भी आ गया। विजय ने बाहरी लोगों के घरेलू झगड़े में जरूरत नहीं होने की बात कही। इसी बात पर हितेंद्र और उसके दोनों बेटों प्रथम और जय ने विजय का विरोध किया।
सीमा ने बेटे जय को थप्पड़ मार दिया। जिसके बाद उनके बीच हाथापाई हो गई। चंद्रकला, सीमा और बबीता बीच बचाव करने लगी। हितेंद्र ने कहा कि आज तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा। वह कमरे में जाकर अपनी रिवॉल्वर निकालकर आया और सीमा, बबीता, सुरेंद्र और विजय को जान से मारने की नीयत से गोली मार दी। गोलीबारी होते ही चंद्रभान और परिवार के अन्य सदस्य भागकर दूसरे कमरे में घुस गए। जबकि चंद्रकला चीखते चिल्लाते चौथी मंजिल से नीचे आ गई।
माहौल देखकर पुलिस को लगा लूटपाट हो गई
शकरपुर यादव मार्केट की चार मंजिला इमारत में गोलीबारी की सूचना मिलते पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इमारत के नीचे चंद्रकला और हितेंद्र की मां कृष्णा बिलख रही थी। पुलिस के आने के बाद वह कुछ नहीं बोल पा रही है। पुलिस को लगा कि लूटपाट के दौरान बदमाशों ने गोली चलाई है। पुलिस टीम अपनी सर्विस पिस्टल को निकालकर चौथी मंजिल पर पहुंचे। कमरे के पास पहुंचते ही पुलिस सन्न रह गई। वहां घायलों की चीख पुकार मची थी। जबकि दूसरे कमरे में बंद परिवार के अन्य लोग चिल्ला रहे थे।
पुलिस ने तुरंत घायलों को अस्पताल पहुंचाया और कमरे में बंद लोगों को बाहर निकाला। जिस कमरे में गोली चली थी। वहीं आरोपी बैठा हुआ था। पुलिस ने उसके हाथ से पिस्टल ले लिया और उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद पुलिस की दूसरी टीम ने चंद्रकला से पूछताछ की। जिसने पूरी घटना को बयां किया। उसने बताया कि हितेंद्र का बड़ा बेटा हाल में ही एमबीबीएस में दाखिला लिया है। जबकि छोटा बेटा 11वीं कक्षा का छात्र है।