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कल कहीं ऐसा न हो आप सड़क पर मर रहे हों और लोग वीडियो बना रहे हों, पढ़ें सच

Wed, 04 Sep 2019 02:06 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सड़क दुर्घटना - फोटो : विवेक निगम
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एक भीषण हादसे के बाद पिता और पुत्री खून से लथपथ घायल अवस्था में सड़क पर छटपटाते रह जाते हैं और उन्हें चारों ओर से घेर कर खड़ी भीड़ घंटों इस दर्दनाक दृश्य को ताकती रहती है। एक क्लिक पर फोन का कैमरा ऑन कर सैकड़ों की संख्या में खड़े लोग वीडियो बनाने लगते हैं जब तक कि घायल की तड़प-तड़प कर जान निकल न जाएं। 

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ऐसा केवल दो सितंबर की रात इंडिया गेट के सामने डंपर की चपेट में आए पिता-पुत्री के साथ ही नहीं हुआ, बल्कि इससे पहले भी कई हादसे ऐसे हो चुके हैं जिनमें घायलों की जान बचाई जा सकती थी, मगर वीडियो के चक्कर में लोग सामने वाले की जिंदगी की चिंता ही नहीं कर पाए। यहां पढ़ें पूरी खबर

फरवरी 2017 में बंगलूरू का रहने वाला अली साइकिल पर सवार हो कर जा रहा था, जब पीछे से आ रही एक बस ने उसे कुचल दिया। वहां मौजूद लोग करीब 25 मिनट तक खड़े होकर उसका वीडियो बनाते रहे, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। बड़ी देर के बाद एक शख्स ने उसे पानी पिलाया और काफी मशक्कत के बाद हॉस्पिटल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यहां पढ़ें पूरी खबर
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इसके अलावा पिछले महीने यानी अगस्त में उत्तर प्रदेश के झांसी में एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ट्रक की टक्कर से घायल हो गया और तड़प-तड़प कर सड़क पर ही दम तोड़ दिया, जबकि तमाशबीन बनी भीड़ पुलिस को सूचना देने के बजाय वीडियो बनाने में व्यस्त रही। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस भी मदद के लिए स्थानीय लोगों से मिन्नतें करती रही, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया। पुलिस किसी तरह एमआर को चार पहिया वाहन से मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंची, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यहां पढ़ें पूरी खबर

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वहीं हरिद्वार में चिन्मय डिग्री कॉलेज चौक के पास एक महिला कांस्टेबल की स्कूटी पेड़ से टकरा गई। खून से लथपथ महिला कांस्टेबल सड़क पर तड़पती रही, लेकिन तमाशबीन बने राहगीर मोबाइल से वीडियो बनाते रहे। इसी दौरान भीड़ देख ठहरीं एक बुजुर्ग महिला उन्हें रिक्शे में लादकर मेट्रो अस्पताल ले गईं, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। यदि महिला कांस्टेबल को तुरंत उपचार मिल गया होता तो शायद उनकी जान बच सकती थी। यहां पढ़ें पूरी खबर

ऐसी ही एक और घटना जून 2019 की है जिसे देख कर रोंगटे खड़े हो जाएंगे। दिल्ली के ज्योति नगर में आपसी रंजिश के कारण छह लोगों ने एक व्यक्ति पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थी। घायल हो कर सड़क पर गिर जाने के बाद उसके परिजन लोगों से मदद की गुहार लगाते रहे। वो घायल बेटे के सामने सिर पटक-पटक कर रोते रहे, लोगों ने वीडियो बनाया लेकिन कोई मदद के लिए आगे नहीं आया। 37 सेकंड की इस वायरल वीडियो को देख कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यहां पढ़ें पूरी खबर

यह घटनाएं मानवीय संवेदनाओं की और उससे भी ज्यादा मानवता की त्रासदी है कि किसी को असहाय अधमरा देख कर जल्द से जल्द कैमरा ऑन करने के लिए इतने सारे हाथ उठ जाते हैं, लेकिन उनमें से एक भी आगे आ कर डायल पैड खोल कर एंबुलेंस या पुलिस को फोन करने की जरूरत नहीं समझता है। 

हमारे नैतिक मूल्यों पर भौतिक सुविधाओं का इतना विपरीत असर पड़ेगा, यह इन सुख-सुविधाओं के निर्माताओं ने भी नहीं सोचा होगा। अमर उजाला अपने पाठकों से अपील करता है कि तकनीक और सोशल मीडिया की इस वर्चुअल रेस में आगे निकलने के लिए मानवता और नैतिकता को न भूलें। किसी भी हादसे में घायल व्यक्ति को देखें तो सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए वीडियो बनाने के बजाय आप उनकी सहायता के लिए आगे आएं। 

किसी को सार्वजनिक जगहों पर घायल देख कर तुरंत एंबुलेंस या पुलिस को कॉल कर के सूचित करें। आपके एक सही कदम से किसी की जान बच सकती है साथ ही कई लोगों को सीख भी मिल सकती है। 
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