पावर कॉरपोरेशन और जीडीए अफसरों की कमीशनखोरी का दंश टीएचए के लाखों लोग पूरी गर्मी झेलेंगे। पावर स्टेशनों के निर्माण में घपलेबाजी कर घटिया ट्रांसफार्मर-केबल लगा दिए गए, जो विद्युत लोड नहीं झेल पा रहे हैं।
कॉरपोरेशन अफसरों ने कमीशन के चक्कर में बिना परीक्षण के रातोंरात इनको हैंडओवर भी कर लिया। सप्लाई में बार-बार ब्रेकडाउन हुआ तो घपले की पोल खुली। मामले की जांच एमडी आफिस से शुरू हो गई है।
यह था मामला :
जीडीए ने टीएचए में 33 केवीए के करीब 12 पावर स्टेशनों का निर्माण कराया था। इनके निर्माण में अंडर ग्राउंड पावर केबल रेस्पो (परतनुमा कंक्रीट टैंक बनाकर) के अनुसार नहीं डाला गया। इसमें क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों में घपला हुआ। केबल डबल पेयर की बजाय सिंगल डाला गया और उसे सीधे मिट्टी में दबा दिया गया। इनमें जो ट्रांसफार्मर लगाए गए, उनमें भी जीटीपी (मानक) का पालन नहीं किया गया।
मिलीभगत कर किए हैंड ओवर :
इन पावर स्टेशनों को रातोंरात कॉरपोरेशन अफसरों ने हैंडओवर कर लिया। नियमानुसार इनका परीक्षण नहीं कराया गया। परीक्षण के लिए टीम भी नहीं बनाई गई। केवल इतना ही नहीं, बिजलीघर शुरू करने के दौरान क्षतिग्रस्त हुए ट्रांसफार्मरों-केबलों को गारंटी में होने के बावजूद कारपोरेशन के खर्च पर बदलवाया गया।
ऐसे हुआ खुलासा :
पिछले दिनों वैशाली क्षेत्र में पावर स्टेशन का केबल फाल्ट हुआ। इसको सर्च करने पर पता चला कि केवल टेंच के अनुसार नहीं डाली गई है। जमीन में केबल का पता ही नहीं है कि वह कहां है? ऐसे में सप्लाई शुरू कराने में चार दिन का समय लगा।
यह है घपला :
सूत्रों के अनुसार केबल डालने में करीब 55 करोड़ का घपला हुआ है। ट्रांसफार्मर में करीब 50 करोड़ का घपला है। खराब होने वाले ट्रांसफार्मरों को गारंटी पीरियड में कंपनी से न बदलवाकर कॉरपोरेशन ने 15 करोड़ रुपये बबार्द किए हैं। इसके बावजूद पावर स्टेशन गर्मियों में सप्लाई देने में सक्षम नहीं हैं।
यह की गई सिफारिश :
पावर कॉरपोरेशन ने जीडीए को पत्र लिखकर केबल को दोबारा से डलवाने की मांग की है। जबकि जीडीए हैंडओवर करने वाले कॉरपोरेशन अफसरों पर इसका ठीकरा फोड़ रहा है। एमडी आफिस से इसकी जांच शुरू हो गई है। शनिवार को डीएलओ सुमनलता टीम के साथ चीफ आफिस पहुंची और जांच शुरू की।