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इंपोर्टेड उम्मीदवार बदलेंगे इस सीट की किस्मत!

Mon, 24 Mar 2014 04:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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गाजियाबाद लोकसभा सीट हमेशा से ही हॉट और चर्चित रही है लेकिन इस सीट के बारे में यह भी बात चर्चा में है कि यहां से चुनाव जीतने वाला उम्मीदवार अपने क्षेत्र में बहुत कम ही सक्रिय रहा है।
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यूपी का प्रवेशद्घार कहे जाने वाले गाजियाबाद का इस्तेमाल सिर्फ दिल्ली पहुंचने के लिए किया जाता है। यहां के सांसद चुनाव के बाद कहां गुम हो जाते हैं ये शायद ही कोई बता पाए।

इस सीट से अब तक कांग्रेस, बीजेपी के अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की लेकिन गाजियाबाद को वह मुकाम कोई नहीं दे सका जिसका वह हकदार है। इस बार मैदान में तीन प्रमुख पार्टियों ने पैराशूट से कैंडिडेट उतारे हैं। क्या ये चुनाव बाद नजर आएंगे यहां:
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एक महीने पहले ही ज्वाइन की पार्टी

भारतीय सेना के 24वें थल सेनाध्यक्ष रहे जनरल वीके सिंह को बीजेपी में शामिल हुए अभी एक महीने भी नहीं हुआ है। इसके पहले वह अन्ना हजारे के आंदोलनों से जुड़े रहे।

साल 2012 में सेना से रिटायर होने वाले जनरल वीके सिंह मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं और गाजियाबाद सीट या यूपी से इनका कोई खास जुड़ाव अब तक नहीं रहा। ऐसे में उनके लिए यहां के लोगों को अपने हक में मतदान करने के लिए प्रेरित करना बड़ी चुनौती है।

प्रमुख मुद्देः देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता, भ्रष्टाचार, विकास, बिजली-पानी आदि समस्याएं।

वोटों की खातिर यहीं बसने का इरादा

कांग्रेस ने फिल्म अभिनेता और फिरोजाबाद से सांसद राज बब्बर को गाजियाबाद सीट से मैदान में उतारा है। बब्बर भी गाजियाबाद से जुड़े नहीं हैं इसलिए उनपर भी बाहरी का टैग लगा हुआ है।

हालांकि राज बब्बर ने बाहरी के टैग को मिटाने के लिए गाजियाबाद में ही अपना आशियाना बसाने की सोची है। बीते दिनों में राज बब्बर की रैलियों और रोड शो में काफी भीड़ जुटी है। हालांकि फिल्म कलाक‌ार होने के कारण भी लोग उनकी झलक पाने को बेताब रहते हैं।

प्रमुख मुद्देः भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्‍था
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इस सीट से एक मात्र महिला उम्मीदवार

एक निजी चैनल में एंकर रहीं शाजिया इल्मी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरूआम आम आदमी पार्टी से की है। शाजिया इस सीट पर एक मात्र महिला उम्मीदवार हैं।

शाजिया पर भी इंपोर्टेड प्रत्याशी की मुहर लगी हुई है क्योंकि वह मूलतः दिल्ली की रहने वाली है और गाजियाबाद से उनका कोई खास जुड़ाव इसके पहले नहीं रहा। हालांकि उम्मीदवार घोषित होने के बाद से वह अपने क्षेत्र में काफी सक्रिय दिख रही हैं।

प्रमुख मुद्देः मंहगाई, भ्रष्टाचार, बिजली, पानी, इंफ्रास्ट्रक्चर।
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