इंसान के मस्तिष्क में होने वाले ग्लीओमा ट्यूमर (कैंसर) की पहचान डिफ्यूजन टेंसर इमेजिंग (डीटीआई) के जरिये आसानी से हो सकती है।
मानेसर स्थित नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर और बीएचयू आईआईटी के विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में साबित किया है कि इस तकनीक से डॉक्टर कैंसर की स्टेज और मस्तिष्क में इसके फैलाव का सही आंकलन कर सकते हैं।
दरअसल भारत में हर साल इस बीमारी के करीब 10 लाख मामले सामने आते हैं। कई केस ऐसे होते हैं जिनमें ट्यूमर का फैलाव मस्तिष्क में हो चुका होता है, लेकिन सही जांच न होने के कारण डॉक्टरों को इसका सही अनुमान नहीं लग पाता।
कई बार मरीज की उपचार के दौरान मौत भी हो जाती है। इंसान के मस्तिष्क में यह ट्यूमर एक से दूसरे छोर तक भी पहुंच सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार डीटीआई एक एमआरआई आधारित तकनीक है जिसके जरिये मस्तिष्क में सफेद पदार्थ के साथ पानी के अणुओं की स्थिति का पता चल जाता है।
जर्नल ऑफ न्यूरो ऑकोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन के बारे में नेशनल ब्रेन रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. विकास पारीक बताते हैं कि देश में ज्यादात्तर डॉक्टर इस तरह के मामलों में एमआरआई और सीटी स्कैन की जांच पर ही भरोसा करते हैं। जबकि डीटीआई तकनीक की मदद से वे ऐसे ट्यूमर की पहचान और उसके फैलाव का पता आसानी से लगा सकते हैं।