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Delhi NCR News: एक साल से कोमा में पति, हाईकोर्ट ने पत्नी को बनाया कानूनी अभिभावक

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- वर्तमान समय में कानून में पत्नी को कानूनी अभिभावक बनाने का कोई प्रावधान नहीं है
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- ब्रेन हैमरेज के चलते 100 फीसदी दिव्यांगता के कारण पत्नी को दी गई अथॉरिटी
- अदालत ने इलाज व अन्य खर्चों के लिए पति के बैंक अकाउंट समेत सभी खर्चों के लिए अधिकार दिए

गौरव बाजपेई
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक दुर्लभ मामले में कोमाग्रस्त पति की सेवा के लिए पत्नी को कानूनी अभिभावक नियुक्त किया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि वर्तमान में कोई कानून उन्हें या किसी कानूनी उत्तराधिकारी को अभिभावकीय अधिकार की अनुमति नहीं देते हैं। जबकि गंभीर चिकित्सकीय खर्चों के लिए उन्हें पति के बैंक खातों और अन्य उपलब्ध संशाधनों के इस्तेमाल की जरूरत है। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रोफेसर अलका आचार्य को उनके पति सलाम खान का कानूनी अभिभावक नियुक्त किया है। सलाम खान फरवरी 2025 से कोमा में हैं।

न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की अदालत ने यह फैसला साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर को सुनाया। अदालत ने जिसमें 'पैरेंस पैट्रिए' अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया गया। सलाम खान को ब्रेन हेमरेज के बाद गंभीर स्थिति में रखा गया है और वे पूरी तरह से असमर्थ हैं। प्रोफेसर अलका आचार्य ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने पति की संपत्ति, वित्तीय मामलों और चिकित्सा खर्चों को संभालने के लिए अभिभावक बनने की मांग की थी। अदालत ने याचिका पर विचार करते हुए मेडिकल बोर्ड और एसडीएम की रिपोर्ट का हवाला दिया। गोविंद बल्लभ पंत इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जीआईपीएमईआर) के मेडिकल बोर्ड ने 13 दिसंबर 2025 को जारी रिपोर्ट में कहा कि सलाम खान 'पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट' में हैं, ट्रेकियोस्टॉमी और राइल ट्यूब पर निर्भर हैं, और उनकी विकलांगता 100 प्रतिशत है। वे कोई निर्णय लेने में असमर्थ हैं और निरंतर देखभाल की जरूरत है।
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एसडीएम (साउथ-वेस्ट) की 8 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट में याचिका की सत्यता की पुष्टि की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि अलका आचार्य सलाम खान की वैध पत्नी हैं, जिनसे दो बच्चे तारा ईशा और आर्यन ईशान हैं। कोई अन्य क्लास-1 वारिस नहीं है। परिवार की वित्तीय स्थिति स्थिर है, मासिक आय लगभग 1 लाख रुपये (रॉयल्टी सहित) है, जबकि चिकित्सा खर्च 1.20 लाख रुपये मासिक है। संपत्तियों में एचडीएफसी बैंक खाते, म्यूचुअल फंड, वाहन और द्वारका व ग्रेटर नोएडा में फ्लैट शामिल हैं। पड़ोसियों ने भी परिवार में कोई विवाद न होने की पुष्टि की।
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क्या है पैंरेस पैट्रिए
पैरेंस पैट्रिए एक लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है राष्ट्र के माता-पिता या देश का अभिभावक। यह एक कानूनी सिद्धांत है जो राज्य या अदालत को उन लोगों की रक्षा करने का अधिकार देता है जो खुद अपनी देखभाल या निर्णय लेने में असमर्थ हैं।
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