फरीदाबाद नगर निगम की बैठक में संसद और विधानमंडल जैसा माहौल बनता जा रहा है। विकास कार्यों, साफ-सफाई और कूड़ा प्रबंधन के मुद्दों को लेकर आपस में हुई जमकर खींचतान के बीच बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही।
बैठक की शुरूआत में ही पार्षदों ने मेयर अशोक अरोड़ा, सीनियर डिप्टी मेयर मुकेश शर्मा, डिप्टी मेयर राजेंद्र भामला और नगर निगम अफसरों को विकास कार्यों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए घेर लिया।
वार्ड-32 के पार्षद राव रामकुमार ने अपने वार्ड में सामुदायिक भवन दो साल से लटकने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2011 में सदन से पास होने के बावजूद सामुदायिक भवन का कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।
पार्षद अजय बैंसला और ओमप्रकाश रक्षवाल ने निगम द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन के लिए तीन एक्सईएन और नौ असिस्टेंट इंजीनियरों के नए पद सृजित करने का कड़ा विरोध किया। अन्य पार्षदों ने भी उनका समर्थन किया।
पार्षदों का कहना था कि निगम में अधिकारियों की कमी नहीं है। उन्हें ठीक से काम नहीं सौंपा गया है। सभी पार्षदों ने नए पद सृजित होने से निगम पर पड़ने वाले 50.39 लाख रुपये के अतिरिक्त भार पर कड़ी नाराजगी जताई।
करीब एक घंटे देरी से शुरू हुई बैठक में 18 मदों पर ही चर्चा हो सकी। इनमें निगम की जमीन सरकारी रेट पर देने, वार्ड-8 व 10 की सफाई व्यवस्था, पार्क और भवनों में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने, स्ट्रीट लाइन लगाने व गलियों को पक्का करने पर चर्चा मुख्य रूप से शामिल रही।
सीवर समस्या अहम मुद्दा
निगम आयुक्त सुप्रभा दहिया ने शहर में सीवर की समस्या को अहम मुद्दा माना। उन्होंने कहा कि फरीदाबाद के तीनों जोन में यह समस्या सबसे गंभीर है। इसके लिए निगम प्रशासन एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के पास प्रस्ताव बनाकर जल्द भेजेगा। उन्होंने बताया कि शहर में पानी की समस्या से निपटने के लिए मार्च तक सभी छह रेनीवैल शुरू कर दिए जाएंगे। इससे समस्या हल होने की संभावना है।