व्यक्तिगत जीवन में साधना करने से अंतरात्मा में रामराज्य की स्थापना होगी, लेकिन सामाजिक जीवन में रामराज्य की स्थापना के लिए हमें अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाने के साथ-साथ भ्रष्टाचार, अनैतिकता और अराजकता के विरुद्ध लड़ना होगा। हमारे विचार और व्यवहार हिंदू संस्कृति के अनुकूल होने चाहिए। हैलो नहीं, बल्कि नमस्कार या 'राम-राम' कहना, क्योंकि यह हमारी संस्कृति है। टीवी पर धारावाहिक देखना नहीं, बल्कि 'कीर्तन-भजन' देखना चाहिए, यह हमारी संस्कृति है। कोई अभिनेता नहीं, बल्कि भगवान राम-कृष्ण हमारी संस्कृति द्वारा दिए गए आदर्श हैं। हमारे आचरण और व्यवहार में हम संस्कृति की रक्षा करें और धर्म का पालन करें। ऐसा आह्वान हिंदू जनजागृति समिति के श्रीराम लुकतुके ने किया।